दिल्ली में आयोजित चार राज्यों के कार्यक्रम में भाग लेकर लौटीं पूर्णिया की दो जीविका दीदी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पूर्णिया&lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> कर्नाटक स्वास्थ्य संवर्धन ट्रस्ट&comma; यूएसएआईडी एवं स्वास्थ्य परिवार एवं कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा दिल्ली में आयोजित एक दिवसीय कार्यक्रम में जीविका के माध्यम से टीबी उन्मूलन को लेकर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य परिवार एवं कल्याण मंत्री डॉ मनसुख मांडविया एवं राज्य मंत्री डॉ भारती प्रवीण पवार सहित यूएसएआईडी एवं केएचपीटी के वरीय अधिकारियों की उपस्थिति में तेलंगाना&comma; कर्नाटक&comma; असम एवं बिहार से मात्र पूर्णिया जिले की दो जीविका दीदी प्रीति एवं पूजा को इस कार्यक्रम में बुलाया गया था। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पूर्णिया वापस आने के बाद पूर्णिया शहर स्थित केयर इंडिया के कार्यालय के सभागार में सम्मानित करने का कार्यक्रम किया गया था। जिसमें संचारी रोग पदाधिकारी डॉ महम्मद साबिर&comma; केयर इंडिया के डिटीएल आलोक पटनायक&comma; केएचपीटी के डीसी विजय शंकर दूबे&comma; जीविका के डीपीएम सुनिर्मल&comma; संचार प्रबंधक राजीव रंजन के द्वारा संयुक्त रूप से दोनों दीदियों को पुष्प गुच्छ से सम्मानित किया गया और बेहतर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित भी किया गया। इस अवसर पर केएचपीटी से जुड़े श्यामदेव राय&comma; पंकज कुमार&comma; सोमनाथ झा&comma; अभिषेक रंजन&comma; रवि कुमार एवं सिफार के प्रमंडलीय कार्यक्रम समन्वयक धर्मेंद्र कुमार रस्तोगी उपस्थित थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>टीबी को खत्म करने की लड़ाई में जीविका समूह का अहम योगदान&colon; सीडीओ<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>संचारी रोग पदाधिकारी डॉ मोहम्मद साबिर ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान में स्वास्थ्य विभाग को केएचपीटी&comma; केयर इंडिया सहित कई अन्य सहयोगी संस्थाओं द्वारा जितना सहयोग किया जा रहा है शायद उससे कही ज़्यादा जीविका समूह से जुड़ी जीविका दीदियों के द्वारा सहयोग किया जाता है। क्योंकि ग्रामीण स्तर पर कार्य करने का जज़्बा इन लोगों के पास सबसे अधिक होता है। भारत से टीबी को खत्म करने की लड़ाई में ग्रामीण स्तर से लेकर जिला स्तर तक जीविका समूह से जुड़े अधिकारियों एवं दीदियों का योगदान काफ़ी सराहनीय है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>टीबी संक्रमित व्यक्तियों को हीन भावना से नहीं देखना चाहिए&colon; सुनिर्मल<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जीविका के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुनिर्मल ने कहा कि भारत से टीबी का उन्मूलन न सिर्फ देश के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह पूरे विश्व के लिए गहरे प्रभाव वाला होगा। जीविका की दीदी किसी भी बीमार व्यक्ति या संक्रमित मरीज़ों के साथ हीन भावना नहीं रखती है बल्कि अपनी सुरक्षा करते हुए उन्हें भी स्वास्थ्य रखने के लिए प्रेरित करती है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं जीविका समूह से जुड़कर और स्वरोजगार अपनाकर आसपास की महिलाओं को स्वास्थ एवं पोषण के संबंध में डोर टू डोर भ्रमण करती हैं और साप्ताहिक एवं मासिक बैठक का आयोजन भी करती हैं। महिलाओं एवं किशोरियों को मासिक धर्म के समय स्वच्छता&comma; गर्भवती महिलाओं के खानपान&comma; धातृ महिलाओं को स्तनपान&comma; टीबी संक्रमित मरीज़ों को पौष्टिक आहार खाने एवं विभिन्न प्रकार के संक्रमण सहित हाथों की सफ़ाई को लेकर कार्य करने के साथ ही जागरूक भी करती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>टीबी मुक्त अभियान में जीविका समूह का योगदान यागदार रहेगा&colon; जीविका दीदी<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रीति कुमारी ने बताया कि विगत छः वर्षो से जीविका समूह के साथ जुड़कर कार्य कर रही हूं। लेकिन अभी तक किसी बड़े कार्यक्रम के आयोजन में जाने का मौका नहीं मिला। लेकिन केएचपीटी के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लेकर वापस लौटी हूं। टीबी बीमारी के प्रति स्थानीय ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए ही मेरा चयन हुआ था। वही पूजा कुमारी का कहना है कि 2017 से जीविका के साथ जुड़कर कार्य करने में जितनी आत्मसंतुष्टि मिलती है शायद कोई और कार्य करने से नहीं मिले। घर परिवार के साथ रहते हुए हजारों महिलाओं को जागरुक कर विभिन्न तरह के रोगों के बारे में जानकारी देना मानवता का परिचायक हैं।<&sol;p>&NewLine;

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