एम्स में कैंसर रेडिएशन पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम की हुई शुरुआत

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> एक समय था जब बिहार के कैंसर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था। आर्थिक तंगी के कारण कई मरीज अपना इलाज तक नहीं करवा पाते थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। बिहार में कैंसर के इलाज के लिए आधुनिक तकनीकें उपलब्ध हो चुकी हैं। आज हम इलाज की सीमाओं से आगे बढ़कर उसके साइड इफेक्ट को कम करने और खत्म करने पर काम कर रहे हैं। उक्त बातें वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ एवं आयोजन अध्यक्ष पद्मश्री डॉ&period; जितेंद्र कुमार सिंह ने शुक्रवार को एम्स पटना में कैंसर रेडिएशन पर आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन पर कही। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि बिहार में कैंसर के इलाज की आधुनिकतम सुविधाएं मौजूद हैं। इस वैश्विक मंच पर रेडिएशन के मानव और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव और दुनिया भर में हो रहे शोध पर विस्तार से बात की जाएगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन &lpar;डीआरडीओ&rpar; के महानिदेशक उपेंद्र नारायण सिंह ने शिरकत की&comma; जबकि एम्स पटना के निदेशक सौरभ वार्ष्णेय विशिष्ट अतिथि रहे। डॉ&period; वार्ष्णेय ने कहा&comma; &&num;8220&semi;कैंसर के इलाज में अभी भी व्यापक शोध की आवश्यकता है ताकि अधिक से अधिक मरीज इस घातक बीमारी से निजात पा सकें।&&num;8221&semi; इस कार्यक्रम में आयोजन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ&period; रमेश बिलिमग्गा&comma; डॉ&period; बी&period;एन&period; पांडे&comma; डॉ&period; अमित कुमार&comma; और एम्स पटना के बायोकेमिस्ट्री विभाग की प्रमुख डॉ&period; साधना शर्मा समेत देश-विदेश के कई प्रसिद्ध वैज्ञानिक और शोधकर्ता शामिल हुए। फ्लैश रेडियोथेरेपी कैंसर के इलाज में क्रांति&comma; कम साइड इफैक्ट में प्रभावी इलाज<br>कार्यक्रम के पहले दिन रेडियोथेरेपी में हो रही नई खोजों पर चर्चा हुई। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र&comma; मुंबई से आए एस&period;डी&period; शर्मा ने फ्लैश रेडियोथेरेपी तकनीक पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह तकनीक पारंपरिक रेडियोथेरेपी की तुलना में 300 गुना अधिक त्वरित है और कम समय में ही ट्यूमर पर प्रभावी रेडिएशन पहुंचाती है। इसके कारण मरीज इलाज के दुष्प्रभावों से बच सकते हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एम्स गुवाहाटी के गौतम शर्मा ने लैटिस रेडियोथेरेपी तकनीक पर बात की&comma; जो कि बड़े ट्यूमर से निजात दिलाने में काफी कारगर साबित होता है। इस दौरान जर्मनी के जॉर्ज इलियाकिस&comma; एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय नीदरलैंड्स के हांस क्रेजी&comma; आईयूएसी दिल्ली के अविनाश पांडे&comma; और यूटी साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर अमेरिका के आशीष रंजन जैसे वैश्विक वैज्ञानिकों एवं चिकित्सकों ने रेडिएशन के विभिन्न पहलुओं पर अपने शोध प्रस्तुत किए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रेडिएशन के आखिरी चरण में शरीर में होने वाले बदलावों पर हुई चर्चा इसके साथ ही&comma; एएफआरआरआई अमेरिका के वी&period;के&period; सिंह&comma; जिन्होंने परमाणु बम के दुष्प्रभावों को कम करने पर गहरी शोध की है&comma; ने रेडिएशन के आखिरी चरण में शरीर में होने वाले बदलावों को पहचानने की विभिन्न तकनीकों पर गहरी चर्चा की। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र&comma; मुंबई के अमित कुमार और केएईआरआई दक्षिण कोरिया के संग की जो ने रेडिएशन के नए आयामों पर अपने विचार साझा किए। स्टॉकहोम विश्वविद्यालय&comma; स्वीडन के आंद्रेज वोज्सिक ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर रेडिएशन के प्रभाव को लेकर अपने शोध का प्रस्तुतीकरण किया। इस दौरान विभिन्न सत्र की अध्यक्षता डॉ के पी मिश्रा&comma; डॉ राजीव रंजन प्रसाद&comma; डॉ राजेश कुमार सिंह&comma; डॉ मनीषा सिंह&comma; डॉ ऋचा चौहान&comma; डॉ शेखर केसरी&comma; डॉ पी एन पंडित&comma; डॉ एच एन दिवाकर&comma; डॉ अखिलेश्वरी नाथ&comma; डॉ सुधीर चंदना आदि ने की। कार्यक्रम में देशभर के 200 से ज्यादा कैंसर रोग विशेषज्ञ मौजूद रहे।<&sol;p>&NewLine;

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