ठंड की मार से ठिठुरी बिहार की ज़िंदगी, शहर से गांव तक रोजमर्रा की जद्दोजहद बढ़ी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> बिहार में जारी भीषण ठंड और घने कोहरे ने केवल तापमान ही नहीं गिराया है&comma; बल्कि आम लोगों की दिनचर्या और जीवन स्तर को भी गहरे तौर पर प्रभावित किया है&period; लगातार कई दिनों से न्यूनतम तापमान 4 से 9 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है&comma; जबकि अधिकतम तापमान भी 13 से 18 डिग्री सेल्सियस के दायरे में सिमटा हुआ है&period; मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक राज्य में मौसम शुष्क रहेगा&comma; लेकिन मध्यम से घना कोहरा और शीत दिवस जैसी स्थिति बनी रहेगी&comma; जिससे हालात और कठिन होने की आशंका है&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राजधानी पटना से लेकर गांव-देहात तक सुबह की शुरुआत बेहद मुश्किल हो गई है&period; सुबह 6 से 8 बजे के बीच सड़कों पर घना कोहरा छाया रहता है&period; दृश्यता कई इलाकों में 50 से 100 मीटर तक सिमट जाती है&period; ऐसे में दिहाड़ी मजदूर&comma; रिक्शा चालक&comma; ठेला-खोमचा लगाने वाले और निर्माण कार्य से जुड़े लोग काम की तलाश में घर से निकल तो रहे हैं&comma; लेकिन न तो काम मिल पा रहा है और न ही पूरी मजदूरी&period; ठंड और कोहरे के कारण निर्माण कार्य&comma; सड़क मरम्मत और निजी भवन निर्माण लगभग ठप पड़े हैं&comma; जिससे हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पटना&comma; गया&comma; मुजफ्फरपुर&comma; भागलपुर&comma; पूर्णिया और दरभंगा जैसे शहरों में सुबह-सुबह लगने वाले सब्जी और फल के थोक बाजारों में भी सन्नाटा पसरा रहता है&period; किसान और व्यापारी देर से बाजार पहुंच रहे हैं&period; हाट-बाजारों में ग्राहकों की संख्या भी कम हो गई है&period; ठंड के कारण लोग जरूरी सामान के अलावा खरीदारी से बच रहे हैं&period; इससे छोटे दुकानदारों और फुटपाथी व्यापारियों की आमदनी में भारी गिरावट आई है&period; कई गरीब परिवार ऐसे हैं&comma; जिनके लिए एक दिन की मजदूरी ही पूरे घर का खर्च चलाती है&comma; लेकिन ठंड के कारण लगातार दूसरे-तीसरे दिन काम नहीं मिल पा रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ग्रामीण इलाकों में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं&period; सुबह और शाम के समय खेतों में काम करना मुश्किल हो गया है&period; हालांकि रबी फसलों के लिहाज से यह ठंड आंशिक रूप से फायदेमंद मानी जा रही है&period; गेहूं&comma; सरसों&comma; चना और मटर जैसी फसलों के लिए यह ठंड अनुकूल बताई जा रही है&comma; क्योंकि इससे फसल की बढ़वार अच्छी होती है&period; लेकिन किसान यह भी कह रहे हैं कि अत्यधिक कोहरा और लगातार शीत दिवस की स्थिति से फसलों में रोग लगने का खतरा बढ़ गया है&period; आलू और सब्जी की फसलों पर पाले का डर बना हुआ है&period; छोटे किसान&comma; जिनके पास सिंचाई और फसल सुरक्षा के सीमित साधन हैं&comma; वे सबसे ज्यादा चिंता में हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उत्तर बिहार के जिलों अररिया&comma; किशनगंज&comma; मधुबनी&comma; सीतामढ़ी&comma; सुपौल&comma; शिवहर और पश्चिमी चंपारण में घना कोहरा लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है&period; वहीं दक्षिण बिहार के गया&comma; नवादा&comma; शेखपुरा&comma; लखीसराय और जमुई जैसे जिलों में भी शीत दिवस और घने कोहरे की स्थिति दर्ज की जा रही है&period; मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों में भी उत्तर-पश्चिम&comma; उत्तर-मध्य और उत्तर-पूर्वी बिहार के कई हिस्सों में कोल्ड-डे जैसी स्थिति बनी रह सकती है&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ठंड का सबसे ज्यादा असर गरीब और असहाय वर्ग पर पड़ रहा है&period; खुले में रहने वाले लोग&comma; स्टेशन&comma; बस स्टैंड और सड़क किनारे सोने वाले परिवार अलाव और पतले कंबलों के सहारे रात गुजार रहे हैं&period; कई जगहों पर अलाव की व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है&period; बच्चों और बुजुर्गों में सर्दी&comma; खांसी&comma; बुखार और सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं&period; ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>परिवहन व्यवस्था भी ठंड और कोहरे से प्रभावित है&period; सुबह के समय बसें और ट्रेनें देरी से चल रही हैं&period; सड़कों पर वाहन चालक धीमी गति से चलने को मजबूर हैं&comma; जिससे काम पर पहुंचने में देर हो रही है&period; कई मजदूरों का कहना है कि जब वे देर से पहुंचते हैं तो ठेकेदार काम देने से मना कर देते हैं&comma; जिससे पूरा दिन खाली चला जाता है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अगले पांच दिनों तक अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने की संभावना है&period; यानी ठंड से फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद कम है&period; <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रशासन की ओर से लोगों को सुबह और देर रात अनावश्यक बाहर न निकलने&comma; गर्म कपड़े पहनने और कोहरे में वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की अपील की गई है&period; लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रोज कमाने-खाने वाले गरीबों के लिए ठंड में घर बैठना कोई विकल्प नहीं है। कुल मिलाकर&comma; बिहार में यह ठंड सिर्फ मौसम की खबर नहीं रह गई है&comma; बल्कि यह आम आदमी की रोजमर्रा की लड़ाई बन चुकी है&period; शहरों से गांव तक लोग ठंड&comma; कोहरे और बेरोजगारी के बीच किसी तरह अपनी जिंदगी और परिवार का पेट पालने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं।<&sol;p>&NewLine;

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