भारतवर्ष और बिहार के लिए कोकलियर इंप्लांट की सफल ऑपरेशन एक क्रांति : मंत्री अवधेश नारायण सिंह

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; अजित &colon;<&sol;strong> कोकलियर इंप्लांट भारतवर्ष में एक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है&period; इसके सफल ऑपरेशन से मुख&comma; बधिर बच्चे बोलने और सुनने लगेंगे&period;यह मेडिकल क्षेत्र में वैसे बच्चों के लिए काफी सुखद होगा जो बच्चे बचपन से बोलने और सुनने में कमजोर हैं&period; ऐसे बच्चों के लिए उनके मां-बाप को जागरूक रहना&period;उक्त बातें शुक्रवार को बिहार विधान परिषद के अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह ने कही&period;वे शुक्रवार को पटना एम्स में कोकालियर इंप्लांट विषय पर दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में लोगों को संबोधित कर रहे थे&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पटना एम्स के निदेशक डॉक्टर जी के पाल ने कोकलियर इंप्लांट के क्षेत्र में पटना एम्स में किया जा रहा है उपचार और विभाग द्वारा अब तक हुई प्रगति के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला&period; उनका के पटना एम्स इस क्षेत्र में लोगों को जागरूक करने का भी अभियान चला रहा है&period;यह सम्मेलन इस क्षेत्र में और नई उपलब्धियां को ऊंचाइयों तक ले जाएगा&period;<br>कोकालियर इंप्लांट की प्रभारी सर्जन डॉक्टर क्रांति भावना ने कहा कि &&num;8220&semi;मुकम करोति वाचलम&colon; मुख बाधीर बच्चे अब बोलने लगेंगे&period; उन्होंने कहा कि पटना एम्स में वैसे बच्चों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है&comma; जो बच्चे बचपन से मुक एवं बाधीर रहें हैं&period;कोकानियर इंप्लांट एक ऐसी मशीन है जो कान के पीछे ऑपरेशन करके बच्चों में लगाई जाती है&period;उन्होंने बताया कि 2 वर्ष से 4 वर्ष के बच्चों को यह मशीन काफी हद तक लाभ पहुंचाने का काम करती है&period;एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पटना एम्स में जन्म के वक्त ही बच्चों की स्कैनिंग की जाती है और उसके माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जाता है कि जन्म लेने वाले बच्चों में सुनने और बोलने की क्षमता कितनी है&period; उन्होंने बताया कि 7 से 8 वर्ष के बाद अगर वैसे बच्चों में कोकालियर इंप्लांट लगाई जाती है जो बच्चे बोलते सुनने में कमजोर हैं&comma; तो वैसे बच्चों पर यह मशीन कारगर नहीं हो पता है&period;उन्होंने हर माता-पिता को यह सुझाव दिया है की जन्म लेने के बाद से ही बच्चों पर यह केयर करना शुरू कर दें&comma; कि उनके बच्चे कितने बोल और सुन पा रहे हैं&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इससे पहले सम्मेलन का उद्घाटन बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने एम्स निदेशक डॉ जी के पाल व अन्य अतिथियों के साथ संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया&period; स्लोवाकिया के विपुल सर्जन डॉ मिलन प्रोफैंट सम्मेलन में मुख्य व्याख्यान दिया &period; उन्होंने कहा कि कोक्लियर इंप्लांट क्षेत्र में पटना एम्स के द्वारा किए जा रहा है प्रयास सार्थक है&period; इस वर्ष का थीम जल्दी शुरू करना और और सही शुरुआत पर कम करें और लोगों को जागरुक भी करें&period;डॉ&period; मार्टिंग एगटरबर्ग और डॉ&period; लियो डी रेव भी ऑडियोलॉजी और पुनर्वास के क्षेत्र में आपने व्याख्यान दिये&period; सम्मेलन के पहले एक कार्यशाला आयोजित की गयी जिसमें उभरते हुए ईएनटी सर्जनों&comma; ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट को प्रशिक्षित कर और उन्हें सर्जरी और सर्जरी के बाद की उपचार रणनीतियों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराया गया&period;<&sol;p>&NewLine;

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