विश्व जनसंपर्क दिवस पर पटना विमेंस कॉलेज में रणनीतिक पीआर पर विशेष व्याख्यान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>पटना विमेंस कॉलेज के जनसंचार विभाग द्वारा विश्व जनसंपर्क दिवस 2026 के अवसर पर एक विशेष अतिथि व्याख्यान का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। &&num;8220&semi;द गोल्डन एज ऑफ स्ट्रैटेजिक पीआर” विषय पर आधारित इस व्याख्यान ने विद्यार्थियों को वर्तमान समय में तेजी से बदलते संचार परिदृश्य में जनसंपर्क की विकसित होती भूमिका से अवगत कराया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ&period; अपराजिता पाठक&comma; सहायक प्राध्यापक&comma; जनसंचार विभाग द्वारा किया गया। उन्होंने सभी उपस्थित अतिथियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डाला तथा मुख्य वक्ता का परिचय कराया। यह आयोजन विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं उद्योगोन्मुख शिक्षा प्रदान करने की विभाग की प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सम्मान एवं आभार स्वरूप सुश्री रोमा&comma; विभागाध्यक्ष&comma; जनसंचार विभाग ने मुख्य वक्ता को पौधा भेंट कर उनका अभिनंदन किया। यह पौधा विकास&comma; सतत विकास तथा कृतज्ञता का प्रतीक था।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ&period; निखिल आनंद गिरि&comma; विभागाध्यक्ष&comma; पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग&comma; मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फ़ारसी विश्वविद्यालय&comma; पटना थे। अपने व्याख्यान में उन्होंने संस्थानों की प्रतिष्ठा निर्माण&comma; हितधारकों के साथ सुदृढ़ संबंध स्थापित करने तथा डिजिटल युग में प्रभावी संचार सुनिश्चित करने में रणनीतिक जनसंपर्क की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक जनसंपर्क केवल प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं है&comma; बल्कि संकट संचार&comma; ब्रांड छवि निर्माण तथा जनसहभागिता सुनिश्चित करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>व्याख्यान को अधिक रोचक एवं व्यावहारिक बनाने के लिए डॉ&period; गिरि ने जनसंपर्क के क्षेत्र से जुड़े अनेक वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के कठपुतली शो अभियान को जन-जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन संचार का एक अभिनव उदाहरण बताया। साथ ही&comma; उन्होंने दिल्ली मेट्रो में भीड़भाड़ एवं भगदड़ जैसी परिस्थितियों के दौरान अपनाई गई जनसंपर्क रणनीतियों का विश्लेषण करते हुए बताया कि प्रभावी संचार&comma; पारदर्शिता तथा समय पर सूचना का प्रसार संकट की स्थिति में जनविश्वास बनाए रखने और सकारात्मक जनधारणा स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>व्याख्यान के उपरांत एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया&comma; जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने प्रश्न रखे तथा मुख्य वक्ता के साथ सार्थक चर्चा की। इस संवाद ने विद्यार्थियों को समकालीन जनसंपर्क की कार्यप्रणाली एवं संचार उद्योग में उपलब्ध करियर अवसरों के संबंध में व्यावहारिक जानकारी प्रदान की।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का समापन डॉ&period; अपराजिता पाठक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता का उनके ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक व्याख्यान के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम की सफलता में योगदान देने वाले सभी प्राध्यापकों&comma; आयोजकों एवं विद्यार्थियों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विश्व जनसंपर्क दिवस के अवसर पर आयोजित यह अतिथि व्याख्यान अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। इस आयोजन ने एक बार पुनः जनसंचार विभाग की शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने तथा कक्षा शिक्षण को व्यावहारिक एवं उद्योग जगत के अनुभवों से जोड़ने की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया।<&sol;p>&NewLine;

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