एसजेएमसी के छात्रों ने डॉ दिवाकर से बिहार और पत्रकारिता के विषय में जाना

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;&colon; <&sol;strong>पटना के आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में स्थित स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ए एन सिन्हा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज के पूर्व निदेशक डॉ डी एम दिवाकर के साथ संस्थान के विद्यार्थियों ने एक सार्थक परिचर्चा में हिस्सा लिया&period; चर्चा में उन्होंने बिहार के सामाजिक&comma; आर्थिक और ग्रामीण व्यवस्था पर पैनी नजर डाली&period; उन्होंने कहा कि अगर समाज में कोई भी बीमारी है तो वह समाज के विभिन्न हिस्सों में नज़र आएगी&period; ग्रामीण पत्रकारिता जरुरी बिहार में ग्रामीण पत्रकारिता पर नए ढंग से काम करने की जरूरत हैं&period; उन्होंने बिहार में आर्थिक असमानता को भी उजागर किया&comma; कहा कि जनसंख्या के अनुपात में बिहार में आर्थिक संभावनाओं में बहुत विरोधाभास है&period; उन्होंने कहा कि बिहार का सबसे बड़ा संसाधन जमीन&comma; पानी और बिहार के लोग हैं&comma; जो बिहार का परिदृश्य बदलने की क्षमता रखते है&period; हमें मानव संसाधन के विकास के लिए बेहतर योजनाएं बनाने की जरूरत हैं&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बिहार की शिक्षा व्यवस्था यहां के छात्रों को अप्रवासी पक्षी बनाती है उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ है और उन्हें इस जिम्मेदारी को समझना होगा&period; आज जब सही आंकड़े नहीं उपलब्ध होने के कारण दिक्कतें हो रही हैं पत्रकारों को इसकी पूर्ति करनी चाहिए&period; उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी अपनी बात रखी&comma; कहा बिहार की शिक्षा व्यवस्था यहां के छात्रों को अप्रवासी पक्षी बनाती है&comma; जो ज्ञान लेने के बाद किसी और प्रांत के विकास में हिस्सेदार बनते हैं&period; उन्होंने संवैधानिक साक्षरता की भी चर्चा की&comma;कहा कि हर घर में संविधान भी रखा जाना चाहिए&period; डॉ दिवाकर के अनुसार हमें कैसा समाज चाहिए ये हमें खुद तय करना है और उसी तरह के संस्थान विकसित करने की जरूरत हैं&period; अच्छी पत्रकारिता समाज को किसी भी मुद्दे पर एक स्वस्थ बहस का मौका देती हैं&period; उन्होंने अपनी बात ये कहते हुए समाप्त की कि बिहार को समझने के लिए पहले आपको बिहार के इतिहास और भौगोलिक परिदृश्य को समझने की जरूरत है&period; किसी भी समाज को विकसित होने के लिए कभी देर नहीं होती&comma; आप जहां है&comma; जिस भी क्षेत्र में है उसमें बेहतर करके समाज के विकास में अपनी भागीदारी निभा सकते हैं&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस परिचर्चा में स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन के निदेशक&comma; डॉ इफ्तेख़ार अहमद&comma; कोऑर्डिनेटर डॉ मनीषा प्रकाश और शिक्षक डॉ अजय कुमार सिंह&comma; डॉ अमित कुमार&comma; डॉ अफ़ाक हैदर ने भी हिस्सा लिया।<&sol;p>&NewLine;

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