संवेदनशील संवाद से बनता है भरोसा, स्वास्थ्य सेवा की सबसे बड़ी ताकत है विश्वास

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित। <&sol;strong>अस्पताल में इलाज के साथ सबसे अहम चीज भरोसा होता है&comma; जो दवाइयों से नहीं बल्कि संवाद और व्यवहार से बनता है। आज के दौर में जानकारी तो बहुत है&comma; लेकिन भरोसे की कमी ने स्वास्थ्य संचार को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। ये विचार एम्स पटना के जनसंपर्क अधिकारी असीम मिश्रा ने व्यक्त किया&period; उन्होंने बताया कि डॉक्टर&comma; नर्स और अस्पताल प्रशासन के बीच होने वाला स्पष्ट और सहानुभूतिपूर्ण संवाद मरीज के विश्वास को मजबूत करता है&period; रिसर्च के अनुसार&comma; अधिकांश मरीज तब ज्यादा भरोसा करते हैं जब उन्हें सरल भाषा में पूरी जानकारी दी जाती है&comma; जबकि कई गंभीर चिकित्सा त्रुटियों का कारण संवाद की कमी भी मानी गई है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>असीम मिश्रा ने कहा कि अस्पताल में हर छोटी प्रक्रिया—रजिस्ट्रेशन से लेकर डिस्चार्ज तक—मरीज के अनुभव और भरोसे को प्रभावित करती है&period; चिकित्सा की जटिल भाषा को आसान बनाना&comma; समय पर सही जानकारी देना और मरीज की बात ध्यान से सुनना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में गलत जानकारी तेजी से फैलती है&comma; ऐसे में अस्पतालों की जिम्मेदारी है कि वे प्रमाणिक और स्पष्ट सूचना लोगों तक पहुंचाएं&period; इस कड़ी में जनसंपर्क अधिकारी की भूमिका अहम होती है&comma; जो अस्पताल और समाज के बीच सेतु का काम करता है। अंत में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल इलाज नहीं&comma; बल्कि संवेदनशील संवाद और सहानुभूति का समन्वय है&period; भरोसा छोटे-छोटे व्यवहार से बनता है और यही भरोसा इलाज को प्रभावी बनाता है।<&sol;p>&NewLine;

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