गर्मी छुट्टी के बाद स्कूल खुला, बच्चों का तिलक लगाकर और फूल बरसाकर स्वागत

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत। कहीं आपने देखा है कि स्कूल खुलते ही बच्चों के माथे पर तिलक लगाया जाए&comma; उन पर फूल बरसाए जाएं&comma; और वे भी अपनी शिक्षिका को तिलक लगाकर गुलदस्ता भेंट करें&quest;&period; जी हां&comma; फुलवारीशरीफ के एक विद्यालय में शिक्षा विभाग के &&num;8220&semi;स्वागत सप्ताह&&num;8221&semi; की शुरुआत एकदम अनोखे और संस्कारयुक्त अंदाज में हुई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>गर्मी की छुट्टियों के बाद 23 जून को जब बच्चे स्कूल पहुँचे&comma; तो स्कूल परिसर किसी त्योहार की तरह सजा हुआ था&period; जैसे ही बच्चे मुख्य द्वार पर पहुंचे&comma; शिक्षिका नीतू शाही ने उन्हें तिलक लगाकर और फूलों की वर्षा कर उनका स्वागत किया&period; बच्चों के चेहरे पर भी चमक थी और उत्साह देखते ही बनता था।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>खास बात यह रही कि बच्चों ने भी अपने शिक्षकों को तिलक कर गुलदस्ते भेंट किए&period; यह दृश्य न केवल मन को भाया&comma; बल्कि शिक्षा और संस्कृति का ऐसा मेल दिखा&comma; जो शायद ही कहीं और देखने को मिले।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विद्यालय में &OpenCurlyQuote;गर्मी छुट्टी एक्सप्रेस’&comma; &OpenCurlyQuote;गृहकार्य एक्सप्रेस’&comma; &OpenCurlyQuote;गणित एक्सप्रेस’&comma; &OpenCurlyQuote;रीडिंग एक्सप्रेस’&comma; और &OpenCurlyQuote;स्वागत सप्ताह एक्सप्रेस’ के माध्यम से पूरे सप्ताह बच्चों को पढ़ाई और आनंद का अनोखा मिश्रण दिया जाएगा। आज का दिन बच्चों के लिए सिर्फ पढ़ाई नहीं&comma; बल्कि मस्ती&comma; अपनापन और आत्मीयता से भरा रहा&period; स्कूल का यह अंदाज शिक्षा के साथ संस्कृति और संस्कार की मिसाल बन गया है।<&sol;p>&NewLine;

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