सनातन से सिख बनी महिला वकील नतमस्तक हुई तख्त पटना साहिब कमेटी द्वारा किया गया सम्मानिन्त

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पटना सिटी&comma; न्यूज क्राइम 24। <&sol;mark><&sol;strong> पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट की महिला वकील जिन्होंने गुरु तेग बहादुर जी की षहादत से प्रभावित होकर सिख धर्म अपनाया और अब उनके 12 वर्षीय पुत्र ने भी अमृतपान करते हुए सिर पर दस्तार सजाई है। महिला वकील अनुराधा कौर खालसा अपने परिवार के साथ तख्त पटना साहिब नतमस्तक हुई। तख्त पटना साहिब के जत्थेदार ज्ञानी बलदेव सिंह के द्वारा उन्हें सिरोपा भेंट किया गया और तख्त कमेटी के अध्यक्ष जगजोत सिंह सोही&comma; उपाध्यक्ष गुरविन्दर सिंह&comma; मीडीया प्रभारी सुदीप सिंह के द्वारा उनका सम्मान करते हुए स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस मौके पर तख्त साहिब के हजूरी कथावाचक ज्ञानी सतनाम सिंह और मैनेजर हरजीत सिंह भी मौजूद रहे।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अनुराधा कौर खालसा ने बताया कि पहले उनका नाम अनुराधा भार्गव हुआ करता था और वह सनातन धर्म से सम्बन्ध रखती थी। पेषे से वकील होने के चलते उनके सम्पर्क में कई सिख बुधिजीवि भी आया करते जिनसे उन्हें गुरु तेग बहादुर जी की षहादत के बारे में पता चला और उसके बाद उन्होंने इस पर रिसर्च की जिसके बाद उन्होंने फैसला लिया और सिख समाज में आकर सिखी का प्रचार किया जा रहा है। संसार के अलग अलग देषों में जाकर लोगों को गुरु तेग बहादुर जी की षहादत के बारे में बताया जा रहा है। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उनकी सेवाओं से प्रभावित होकर उनके स्वयं के पुत्र ने भी सिर पर दस्तार सजाकर अमृतपान किया है। अनुराधा कौर खालसा ने कहा कि देष के लोगों की बदकिस्मती है कि उन्हंे अपने इतिहास की जानकारी ही नहीं है&comma; आज अगर हिन्दु धर्म कायम है तो वह गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान की बदौलत ही है वरना आज देष में केवल एक ही धर्म रह गया होता। उन्होंने कहा हम गुरु तेग बहादुर जी का कर्ज तो नहीं चुका सकते पर उनके षहादत के इतिहास की जानकारी लोगों तक अवष्य पहुंचा सकते हैं।<&sol;p>&NewLine;

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