उम्मीद से उत्कृष्टता तक : ‘आयुष्मान मंथन’ में एम्स पटना ने रचा नया कीर्तिमान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>जब स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र मरीज बनता है तो इलाज सिर्फ प्रक्रिया नहीं&comma; बल्कि भरोसे की एक नई शुरुआत बन जाता है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट &lpar;आद्री&rpar; और बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति ने ऊर्जा ऑडिटोरियम में &OpenCurlyQuote;आयुष्मान मंथन’ कार्यक्रम का आयोजन किया जहां संवाद के जरिए बेहतर और संवेदनशील स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा तय की गई। इस पूरे आयोजन में सबसे अलग पहचान बनाई अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना ने जिसने उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं के लिए पहला स्थान हासिल किया। यह सम्मान उन अनगिनत कहानियों का प्रतिबिंब है जहां मरीजों को समय पर इलाज&comma; आर्थिक राहत और सम्मानजनक देखभाल मिली।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि आयुष्मान भारत की असली ताकत उसकी जमीनी पहुंच में है। उन्होंने बताया कि बिहार में 4&period;16 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं जो लाखों परिवारों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने एम्स पटना की विशेष सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान आज मरीजों के लिए भरोसे का पर्याय बन गया है जहां आधुनिक चिकित्सा के साथ मानवीय संवेदनाएं भी उतनी ही मजबूत हैं। एम्स पटना के चिकित्सा अधीक्षक डॉ&period; अनूप कुमार ने यह सम्मान प्राप्त करते हुए इसे मरीजों के विश्वास और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण को समर्पित किया। बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति के सीईओ शशांक शेखर सिन्हा ने कहा कि मजबूत समन्वय ही वह आधार है जो मरीजों तक बिना बाधा के सेवाएं पहुंचाता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>लाभार्थियों की बात की जाए तो वर्ष 2025 में अकेले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना में 21&comma;383 मरीजों ने इस योजना का लाभ उठाया जो कुल मरीजों का लगभग 36 प्रतिशत है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि भरोसा बढ़ रहा है और सेवाएं लोगों तक प्रभावी रूप से पहुंच रही हैं। इस कार्यक्रम में राज्यभर से आए डॉक्टरों&comma; विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया जिनका एक ही उद्देश्य था&comma; हर मरीज तक बेहतर&comma; सरल और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना। अंत में&comma; &OpenCurlyQuote;आयुष्मान मंथन’ ने यह संदेश दिया कि स्वास्थ्य सेवा केवल इलाज नहीं&comma; बल्कि उम्मीद और विश्वास का आधार है। और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना जैसे संस्थान यह साबित कर रहे हैं कि जब मरीज सबसे पहले होता है तो हर उपचार एक नई जिंदगी की शुरुआत बन जाता है।<&sol;p>&NewLine;

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