मुख्यमंत्री आवास और सरकारी बंगलों के आवंटन पर राजद ने उठाए सवाल

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> राष्ट्रीय जनता दल ने मुख्यमंत्री आवास के विस्तार और सरकारी आवासों के आवंटन को लेकर बिहार सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सोमवार को राजद के राज्य कार्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से कई मुद्दों पर जवाब मांगा। सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि देश के सबसे गरीब राज्यों में शामिल बिहार के मुख्यमंत्री का आवास अत्यधिक भव्य और विस्तृत है। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री के लिए निर्धारित 5&comma; देशरत्न मार्ग आवास को मुख्यमंत्री आवास परिसर में शामिल कर लिया गया है&comma; जबकि अन्य उपमुख्यमंत्रियों को उनके निर्धारित आवास में स्थानांतरित नहीं किया गया है। उन्होंने इसे पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित कार्रवाई बताया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राजद नेता ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को आवास खाली करने के नोटिस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार दोहरे मानदंड अपना रही है। उन्होंने विभिन्न सांसदों&comma; विधायकों&comma; पूर्व मंत्रियों और आयोगों के पदाधिकारियों को आवंटित सरकारी आवासों की समीक्षा कर पूरी सूची सार्वजनिक करने की मांग की।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>संवाददाता सम्मेलन में राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि बिहार में आवास आवंटन की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों और न्यायालय की गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राबड़ी देवी को आवास खाली करने का नोटिस राजनीतिक कारणों से दिया गया है। वहीं राजद के अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवचन्द्र राम ने कहा कि सरकार आवास विवाद को दलित राजनीति से जोड़कर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में दलितों और गरीबों के आवास संबंधी मुद्दों की अनदेखी की जा रही है। इस अवसर पर राजद के प्रदेश प्रधान महासचिव रणविजय साहू&comma; प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद सहित पार्टी के eअन्य नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे। राजद नेताओं ने सरकार से आवास आवंटन नीति को सार्वजनिक करने तथा सभी मामलों में समान नियम लागू करने की मांग की।<&sol;p>&NewLine;

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