महा जुटान–3 में राजस्व सेवा अधिकारियों का शक्ति प्रदर्शन, न्याय और अधिकारों की लड़ाई का ऐलान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> डॉ&period; भीमराव आंबेडकर जयंती के अवसर पर गाय घाट&comma; पटना में आयोजित &OpenCurlyDoubleQuote;महा जुटान–3” के माध्यम से बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों ने एकजुटता और दृढ़ संकल्प का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। बिहार राजस्व सेवा महासंघ &OpenCurlyDoubleQuote;बिरसा” एवं &OpenCurlyDoubleQuote;बिरसा यूनाइटेड” के संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यभर से आए 600 से अधिक अंचल अधिकारी&comma; राजस्व अधिकारी एवं अन्य पदाधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक पाठ से हुई&comma; जिसमें अधिकारियों ने संविधान के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई। मंच से वक्ताओं ने आरोप लगाया कि राजस्व सेवा के अधिकारियों को प्रशासनिक भेदभाव&comma; गैर-बराबरी और संस्थागत अन्याय का सामना करना पड़ रहा है&comma; जो संविधान की मूल भावना के विपरीत है। साथ ही यह भी कहा गया कि कैडर से जुड़े महत्वपूर्ण पदों को सुनियोजित तरीके से दूर किया जा रहा है और उच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी की जा रही है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बैठक में अधिकारियों ने सामूहिक शपथ लेते हुए स्पष्ट किया कि उनकी मांग पूरी तरह सेवा-संबंधी और न्यायसंगत है&comma; जो भूमि सुधार उप समाहर्ता पद पर प्रमोशन से जुड़ी है। उन्होंने यह भी दोहराया कि उनका आंदोलन भ्रष्टाचार-निरोधी प्रयासों के खिलाफ नहीं है&comma; बल्कि वे बिहार को भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मंच से यह सवाल भी उठाया गया कि जब भूमि सुधार उप समाहर्ता का पद राजस्व सेवा का हिस्सा है&comma; तो इसे अन्य सेवा में शामिल करने का औचित्य क्या है। इस दौरान बिहार आपूर्ति संघ एवं ग्रामीण विकास सेवा संघ के प्रतिनिधियों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिरसा के अध्यक्ष आनंद कुमार एवं बिरसा यूनाइटेड के अध्यक्ष आदित्य शिवम शंकर ने कहा कि यदि मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन और व्यापक व निर्णायक रूप लेगा। उन्होंने सरकार से संवाद की इच्छा जताई&comma; लेकिन अधिकारों से समझौता न करने की बात दोहराई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस बीच सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए निलंबन को संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने दमनात्मक कार्रवाई बताया। मोर्चा के अनुसार&comma; कई अंचल अधिकारियों को निलंबित किया गया है&comma; जिससे आंदोलन की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। अंत में संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि न्यायसंगत मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई&comma; तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अधिकारियों ने पारदर्शी&comma; जवाबदेह एवं भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।<&sol;p>&NewLine;

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