प्रेम, भाईचारा व इंसानियत का संदेश देता है रमजान : सेराज अहमद कुरैशी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">गोरखपुर&lpar;न्यूज क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन की ओर से गाजी रौजा स्थित राष्ट्रीय प्रशासनिक कार्यालय में सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन हुआ। गंगा जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाने के लिए प्रिंट&comma; इलेक्ट्रानिक&comma; वेब मीडिया के पत्रकारों ने शिरकत कर मोहब्बत का पैग़ाम दिया।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने सभी पत्रकारों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे रोजा इफ्तार कार्यक्रम के माध्यम से समाज में फैल रही वैमनस्यता को समाप्त किया जा सकता है । रोजेदारों को रोजा खुलवाना नेक काम है । यही हमारी गंगा जमुनी तहजीब का जीवंत उदाहरण है। ऐसे कार्यक्रमों से आपसी भाईचारा एवं प्रेम बंधुत्व बना रहता है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि रमज़ान मोहब्बत का पैग़ाम देता है। अल्लाह ने इस पाक महीने में हर नेक बंदे को रहमत व बरकत से नवाजने का वादा किया है। रमज़ान में रोजेदार के दिल में अल्लाह प्यार का सैलाब भरने के साथ दूसरों के लिए हमदर्दी भी देता है। रोजा रखने से दिल को सुकून और रूह को ताजगी मिलती है। बुरी आदतों से इंसान दूर होता है और नेक राह पर चलने को प्रेरित होता है। खुद को अल्लाह की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक पाक महीना रमज़ान न सिर्फ रहमतों और बरकतों की बारिश लाता है बल्कि समूची मानव जाति को प्रेम&comma; भाईचारे और इंसानियत का संदेश भी देता है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रोज़ा इफ्तार पार्टी में नवेद आलम&comma; मोहम्मद आजम&comma; सैय्यद फरहान अहमद&comma; मुर्तुजा हुसैन रहमानी&comma; अखिलेश्वर धर द्विवेदी&comma; दीपक त्रिपाठी&comma; अवनीश त्रिपाठी&comma;सुभाष गुप्ता&comma; मो&period; रजि&comma; मो&period; शहाब&comma; अफरोज अहमद&comma; मो&period; रजि सिद्दीकी&comma; मोहम्मद अहमद खान&comma; अंशुल वर्मा&comma; डाॅ&period; अतीक अहमद&comma; डाॅ&period; शकील अहमद&comma; मोहम्मद इस्माइल&comma; सतीश चंद्र&comma; विवेक कुमार श्रीवास्तव&comma; ललित सिंह&comma; सुजीत श्रीवास्तव&comma; अजमेर आलम&comma; मोईन सिद्दीकी&comma; जुबेर आलम&comma; रफ़ी अहमद अंसारी&comma; इरफानुल्लाह खान&comma; अहद करीम खान&comma; मोहम्मद सलीमुल्लाह&comma; मिन्हाज़ सिद्दीकी&comma; आशुतोष कुमार&comma; अरशद जमाल सामानी&comma; भानु गुप्ता&comma; राजकुमार शर्मा आदि पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता ने शिरकत की।<&sol;p>&NewLine;

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