भ्रांतियों को दरकिनार कर किशोरियों को लगवाएं ग्राडासील वैक्सीन : जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>जिला सहित पूरे राज्य में इस अभियान के तहत वैसी किशोरियां जिन्होंने अपना 14वां जन्मदिन मना लिया है लेकिन अभी 15 वर्ष की नहीं हुई हैं&comma; वे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर इस घातक सर्वाइकल कैंसर से बचाव का &&num;8216&semi;सुरक्षा कवच&&num;8217&semi; प्राप्त कर रही हैं&period; टीका बिहार सरकार द्वारा निशुल्क लगाया जा रहा है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>65&comma;000 किशोरियों को टीकाकृत करने का लक्ष्य &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ&period; अवधेश कुमार ने बताया कि महिलाओं में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण सर्वाइकल कैंसर है&comma; जिसे केवल समय पर टीकाकरण के जरिए ही रोका जा सकता है&period; उन्होंने कहा कि गार्डासिल वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और 14 से 15 वर्ष की आयु में इसे लगवाना सबसे प्रभावी साबित होता है&period; उन्होंने बताया कि जिला की 65&comma;000 किशोरियों को टीकाकृत करने का लक्ष्य रखा गया है और लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभाग प्रतिबद्ध है&period; उन्होंने बताया कि वैक्सीन जिला के सभी 24&ast;7 संस्थान में उपलब्ध है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>भ्रांतियों और भ्रामक बातों को करें दरकिनार &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि ग्राडासील वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इसे लगवाने से किशोरियों को कोई समस्या नहीं होती है&period; विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत के राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह ने इसे प्रमाणित किया है&period; यह टीका न केवल जान बचाता है&comma; बल्कि परिवारों को भविष्य में होने वाले भारी-भरकम इलाज के खर्च और मानसिक प्रताड़ना से भी सुरक्षित रखता है&period; उन्होंने लोगों से अपील किया कि मन में व्याप्त भ्रांतियों एवं किसी के द्वारा कही जा रही भ्रामक बातों को पूरी तरह नजरअंदाज करें और निश्चित होकर किशोरियों को वैक्सीन लगवाएं&period; उन्होंने कहा कि इसमें जन प्रतिनिधियों की भूमिका अहम है और वह अपने स्तर से लोगों को ग्राडासील वैक्सीन की उपयोगिता और सुरक्षित होने पर जागरूक कर किशोरियों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित करें&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>लक्षणों की पहचान और बचाव ही एकमात्र उपाय &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>चूंकि इस कैंसर के शुरुआती चरण में जननेंद्रियों से असामान्य रक्तस्राव या दर्द जैसे कोई लक्षण दिखाई नहीं देते&comma; इसलिए इसे &&num;8216&semi;साइलेंट किलर&&num;8217&semi; भी कहा जाता है&period; बीमारी बढ़ने पर ही वजन कम होना&comma; पैरों में सूजन या पीठ दर्द जैसे संकेत मिलते हैं&period; ऐसे में बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है&period; विशेषज्ञों का मानना है कि 35 से 45 वर्ष की आयु में जब महिलाएं अपने परिवार और नौकरी के लिए सबसे महत्वपूर्ण सहारा होती हैं&comma; तब यह बीमारी उन्हें अपनी चपेट में लेती है&period; टीकाकरण के माध्यम से इस जोखिम को लगभग समाप्त किया जा सकता है।<&sol;p>&NewLine;

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