श्री गुरु गोविंद सिंह महाविद्यालय में प्रेमचंद जयंती मनाया गया

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पटनासिटी&lpar;न्यूज क्राइम 24&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> श्री गुरु गोविंद सिंह महाविद्यालय किला रोड पटना सिटी में प्रेमचंद जयंती समारोह मनाया गया। इस समारोह की अध्यक्षता यशस्वी प्राचार्य प्रो० &lpar;डॉ०&rpar; कनक भूषण मिश्र ने की। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने प्रेमचंद के महत्व को आज की परिस्थितियों में देखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने जो लिखा&comma; जो उनके लेखन की चिंता थी&comma; वह आज के समाज में दिखाई देता है। समाज में जो परिवर्तन का स्वप्न वे अपनी लेखनी से देख रहे थे&comma; आज हमारे समाज में वे बदलाव और सुधार दृष्टिगोचर हैं। उन्होंने प्रेमचंद की कहानी पंच परमेश्वर के माध्यम से पद के साथ न्याय करने की भावना को प्रमुखता दी और बिना लाग लपेट के निर्णय लेने के विवेक को आज की परिस्थितियों में अति आवश्यक समझा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जयंती समारोह में हिंदी विभागाध्यक्षा डॉ करुणा राय ने अपना उद्घाटक वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य कई दृष्टियों से हमारे लिए विचारणीय है। वह जितना व्यापक है उतना ही वैविध्यमय भी है। समाज के हर वर्ग की बात प्रेमचंद के यहां दिखाई देती है&comma; स्त्रियों की दशा को लेकर प्रेमचंद ने सार्थक हस्तक्षेप किया। इतिहासविद डॉ&period; अंबुज किशोर झा ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य हमारे सामने दर्पण की तरह है&comma; उसी क्रम में हम बिहार की उर्वर साहित्यिक परंपरा को ही देखते हैं&comma; जिसमें रेणु और दिनकर जैसे महत्वपूर्ण साहित्यकार शामिल हैं। भूगोलविद डॉ&period; नंदकुमार ने प्रेमचंद के साहित्य को समाज के लिए अत्यंत उपयोगी बताया और साहित्य के सरस पक्षों की ओर सबका ध्यान खींचा। इतिहास विद डॉ&period; विजय कुमार सिंह ने प्रेमचंद की व्यापक साहित्य दुनिया से सभी को परिचित कराया और उनकी खूबियों को रेखांकित किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राजनीति शास्त्र के विद्वान डॉ&period; उमेश कुमार ने प्रेमचंद के दो महत्वपूर्ण कथनों को याद किया जिसमें एक का आशय था कि मित्रता बालू की जमीन पर उगा हुआ वृक्ष न हो&comma; और दूसरा&comma; बिगाड़ के डर से ईमान की बात को बोलने से हिचकना नहीं चाहिए। रसायनज्ञ और शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ&period; संजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एक विद्यार्थी किस तरह प्रेमचंद के साहित्य से जुड़ता है&comma; और प्रेमचंद का साहित्य कैसे उसे अपनी ओर खींचता है। उन्होंने प्रेमचंद के कम लक्षित पक्ष को हमारे सामने रखा। राजनीति शास्त्र के विद्वान डॉ&period; शम्श तबरेज असलम ने प्रेमचंद की उर्दू परंपरा के योगदान को सबके सामने रखा। अर्थशास्त्र के विद्वान डॉ&period; अरविंद कुमार सिंह ने शब्द की शक्ति&comma; साहित्य की शक्ति और प्रेमचंद के साहित्य की शक्ति का सुंदर विवेचन किया और यह बताया कि साहित्य सभी नागरिकों का मार्गदर्शन करता रहेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मंच पर वनस्पति विज्ञान की विदुषी डॉ&period; पुष्पा सिन्हा और वाणिज्य विभाग के अध्यक्ष डॉ&period; फजल अहमद की गरिमामय उपस्थिति रही। हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ&period; सुनील कुमार ने प्रेमचंद की कहानियों के निहितार्थ को और प्रतीकात्मक अर्थों को देखने पर जोर दिया। उदाहरण के तौर पर उन्होंने दो बैलों की कथा को रेखांकित किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का सफल संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ&period; सुशील कुमार ने किया और प्रेमचंद के साहित्य पर संचालन के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। कार्यक्रम के अंत में हिंदी के सहायक प्राध्यापक लेफ्टिनेंट डॉ&period; अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर डॉ&period; अनिल कुमार सिंह&comma; प्रो० अरुण कुमार&comma; डॉ&period; ज्योति शंकर सिंह&comma; डॉ&period; विकास कुमार&comma; डॉ&period; अंजनी कुमार&comma; डॉ के के धर&comma; डॉ&period; धनंजय कुमार आदि शिक्षकों की मौजूदगी रही। प्रेमचंद जयंती के इस अवसर पर छात्र-छात्राओं की उपस्थिति संतोष देने वाली थी और अनेक छात्र-छात्राओं ने अपनी उत्साहमय उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों के बीच अल्पाहार का वितरण किया गया तथा फोटो सेशन का भी आयोजन किया गया।<&sol;p>&NewLine;

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