नीतीश कुमार के फैसले से झूम उठे फुलवारी के लोग, पेंशन वृद्धि पर मंगलीचक में जताया आभार

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत। बिहार सरकार द्वारा वृद्धजन&comma; विधवा और दिव्यांग पेंशन को ₹400 से बढ़ाकर ₹1100 मासिक करने की घोषणा के बाद फुलवारी &lpar;सु&rpar; विधानसभा क्षेत्र के मंगलीचक महादलित बस्ती में सोमवार को हर्ष और आभार का माहौल देखने को मिला&period; इस जनकल्याणकारी फैसले को लेकर एक धन्यवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया&comma; जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं&comma; बुजुर्ग और दिव्यांग लाभार्थी शामिल हुए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में पूर्व विधायक अरुण मांझी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे&period; उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ पेंशन बढ़ाने का नहीं&comma; बल्कि एक सशक्त और संवेदनशील बिहार के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम है&period; मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह साबित कर दिया है कि वह हर वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलने वाले नेता हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम की शुरुआत मिठाइयों के वितरण और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थन में गूंजते नारों के साथ हुई&period; लाभार्थियों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने वृद्धजनों के लिए बुढ़ापे की लाठी मजबूत कर दी है&comma; जिससे अब उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ जीवन जीने की उम्मीद मिली है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रामप्यारी देवी &lpar;उम्र 78 वर्ष&rpar;&comma; जो इस बस्ती की एक वृद्धा हैं&comma; भावुक होकर बोलीं – &OpenCurlyDoubleQuote;हमारे पास कोई बेटा नहीं है&comma; लेकिन नीतीश बाबू ने हमें सहारा दिया है&period; अब महीने भर की दवा और राशन की चिंता नहीं रहती।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जदयू नेता सुमित कुशवाहा ने इस पहल को &OpenCurlyDoubleQuote;नीतीश कुमार की लोककल्याणकारी सोच का प्रतिबिंब” बताया और कहा कि समाज के सबसे कमजोर तबके के उत्थान की चिंता करना ही सच्चा नेतृत्व है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर जदयू के स्थानीय नेता छोटू सिंह&comma; सतीश सिंह&comma; रंजीत पटेल&comma; भवानी सिंह&comma; इंद्रदेव राम&comma; कृष्णा मांझी&comma; बिठ्ल मांझी&comma; भुषण मांझी&comma; शांति देवी मांझी&comma; जगदीश पासवान&comma; गीता देवी&comma; फुलेश्वरी देवी&comma; कान्ती देवी&comma; सुरज पासवान&comma; रामबाबू मांझी और जसमती देवी समेत अनेक पंचायत प्रतिनिधि और सैकड़ों लाभार्थी मौजूद रहे। लोगों ने एक स्वर में कहा कि यह निर्णय उनके जीवन में राहत&comma; सुरक्षा और आत्मसम्मान लेकर आया है&period; बस्ती में अब बदलाव की एक नई उम्मीद जागी है।<&sol;p>&NewLine;

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