महावीर कैंसर संस्थान पटना में “क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी में मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिकस के बदलते परिदृष्य” विषय पर एक दिवसीय सी.एम.ई पर परिचर्चा

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फुलवारी शरीफ&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; महावीर कैसर संस्थान पटना में एक दिवसीय सी&period;एम&period;ई का उद्घाटन आई&period;जी&period;आई&period;एम&period;एस के निदेषक प्रो० &lpar;डा&period;&rpar; बिन्दे कुमार&comma; संस्थान के निदेषक &lpar;प्रषा&rpar; डा० बी&period; सन्याल&comma; चिकित्सा निदेषक डा० मनीषा सिंह&comma; चिकित्सा अधीक्षक डा&period; एल&period; बी&period; सिंह और<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डा० षिवसुब्बु&comma; मुम्बई ने सम्मिलित रूप से किया&period; महावीर कैंसर संस्थान&comma; पटना में कैंसर के नवीनतम निदान एवं उपचार के लिए &OpenCurlyDoubleQuote;क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी में मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिकस &&num;8211&semi; बदलते परिदृष्य” विषय पर एक दिवसीय सी&period;एम&period;ई&period; का आयोजन किया गया&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डा० एल० बी० सिह ने बताया कि बिहार और झारखंड राज्यों में पहली बार एन० जी० एस० लैब की स्थापना महावीर कैंसर संस्थान में की गई है&period;इस जाँच के द्वारा कैंसर रोगियों को नवीनतम निदान और उपचार प्रदान की जाएगी&period; इससे कैंसर के लिए उपचार 100 प्रतिषत प्रभावी और सुरक्षित होंगे&period; प्रत्येक व्यक्ति को तभी उपचार मिलेगा जब उसे उसकी आवष्यकता होगी&comma; और उपचार विषेष रूप से उसके संबंधित कैंसर के लिए उपर्युक्त होगा&period; हालाँकि आज कोई सटिक उपचार उपलब्ध नहीं है&comma; लेकिन टारेगेटेड उपचारों के साथ मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिकस इस सटिक इलाज के करीब पहुंच रहे हैं&period;इसके अलावा&comma; मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिकस का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जा सकता है कि किसी व्यक्ति को किसी विषेष प्रकार के कैंसर का खतरा है या नहीं&period; जब इस तरह से उपयोग किया जाता है तो परीक्षणों को मॉलिक्यूलर जोखिम मूल्यांकन के लिए संदर्भित किया जा सकता है&period; ये परीक्षण किसी व्यक्ति को यह निर्धारित करने में मदद करते हैं कि उसे कैंसर होने की कितनी संभावना है&period; इनका उपयोग यह जानने में किया जा सकता है कि किसी व्यक्ति को अधिक गहन जांच के लिए जाना चाहिए या नहीं और निवारण उपाय करने चाहिए या नहीं&period; सम्मेलन के मुख्य आकर्षण में ऑन्कोलॉजी में जीनोमिक्स की भूमिका और स्तन और थायरॉयड में मॉलिक्यूलर अपडेट शामिल हैं&period;<code>प्रो० &lpar;डा&period;&rpar; बिन्दे कुमार ने अपने संबोधन में कैंसर के इलाज में आनुवांषिकी और आणविक परीक्षणों की आवष्यकता पर प्रकाष डाला&period; उन्होंने एन&period;जी&period;एस&period; लैब की स्थापना के लिए एम&period;एस&period;जी&period; प्रबंधन को बधाई दी&period;<&sol;code><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर विभिन्न वैज्ञानिक सत्र का भी आयोजन किया गया जिनमें मुख्यरूप से श्याम अग्रवाल &lpar;नयी दिल्ली&rpar; डा० ज्योति वाजपेयी &lpar;मुम्बई&rpar; ने डा० श्रीधर डा० आरती डर्रा &lpar;बैंगलोर&rpar; डा० राज ज्योति दास &lpar;गुवाहाटी &rpar;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डा० अषीम मिश्रा &lpar;वाराणसी&rpar; डा० षिखर सावने &lpar;फरीदाबाद&rpar; सहित डा० मनीषा सिंह&comma; डा&period; अविनास उपाध्याय&comma; डा&period; प्रितांजली सिंह&comma; डा&period; विनिता त्रिवेदी एवं डा&period; ऋचा चौहान ने विस्तृतरूप से जर्चा की&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस सी&period;एम&period;ई&period; में डा&period; अरविंद कुमार&comma; डा&period; नवीन कुमार&comma; डा&period; मधुकर दयाल&comma; डा&period; अंजु सिंह&comma; डा&period; षिव शंकर&comma; डा&period; अमित कुमार&comma; डा&period; अविनास सिंह&comma; डा&period; अनिता कुमारी&comma; डा&period; अमृता रोकष&comma; डा&period; दिनेष कमार सिंह&comma; डा&period; रवि व्याहुत&comma; डा&period; सिमा देवी&comma; डा&period; राजेष कुमार सिंह&comma; डा&period; सुबोध कुमार सिंहा&comma; डा&period; अषोक घोष&comma; डा&period; राजीव रंजन प्रसाद&comma; डा&period; आर&period; एन&period; टैगोर&comma; डा&period; शेखर केसरी&comma; डा&period; अनिरूद्ध पोदार&comma; डा&period; अंजीली&comma; डा&period; अनन्या&comma; डा&period; सरिता&comma; डा&period; सुरूति खेमका&comma; डा&comma; खंडेलवाल&comma; डा&period; संदिप कुमार सहित पटना सहित पुरे बिहार से लगभग 300 कैंसर विषेषज्ञों ने भाग लिया&period;<&sol;p>&NewLine;

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