राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर पटना वीमेंस कॉलेज में ‘सूत्रधार-द हैंडलूम रैंप वॉक’ का आयोजन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर पटना वीमेंस कॉलेज में &lpar;स्वायत्त&rpar; के फैशन डिजाइनिंग विभाग ने गृह विज्ञान विभाग के सहयोग से शुक्रवार को &OpenCurlyQuote;सूत्रधार-द हैंडलूम रैंप वॉक’ का आयोजन किया। कार्यक्रम के माध्यम से भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत&comma; टिकाऊ फैशन&comma; नवाचार और पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़ने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन फैशन डिजाइनिंग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ&period; शेमुशी मधु&comma; समन्वयक डॉ&period; गीतांजलि चौधरी तथा गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ&period; शाजिया हुसैन के मार्गदर्शन में किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने हथकरघा आधारित परिधानों और डिजाइन की अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण तीन राउंड की हैंडलूम रैंप वॉक प्रस्तुति रही। पहले राउंड &OpenCurlyQuote;ग्रामीण ग्लैम’ में बिहार के पारंपरिक हथकरघा गमछा का इस्तेमाल कर तैयार किए गए आकर्षक एवं आधुनिक परिधानों को प्रदर्शित किया गया। इस राउंड के माध्यम से ग्रामीण शिल्प कौशल और टिकाऊ फैशन को विशेष रूप से सामने रखा गया। दूसरे राउंड &OpenCurlyQuote;इंडो-वेस्टर्न’ में पारंपरिक हथकरघा कपड़ों को आधुनिक पश्चिमी सिल्हूट के साथ जोड़कर तैयार किए गए फ्यूजन परिधानों का प्रदर्शन किया गया। छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वस्त्रों को आधुनिक फैशन के अनुरूप प्रस्तुत करते हुए अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया। वहीं तीसरे राउंड &OpenCurlyQuote;साड़ी ड्रेपिंग’ में साड़ी को भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसमें विभिन्न क्षेत्रीय एवं समकालीन साड़ी पहनने की शैलियों का प्रदर्शन किया गया। रैंप वॉक के दौरान पारंपरिक परिधानों के साथ आधुनिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम को आकर्षक बना दिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को हथकरघा&comma; फैशन और डिजाइन की अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप से समझने और उन्हें रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत करने का अवसर देना था। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय हथकरघा की विविधता और इसके संरक्षण की आवश्यकता से भी अवगत कराया गया। प्रतियोगिता में कुल 90 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। फैशन डिजाइनिंग एवं गृह विज्ञान विभाग के सभी संकाय सदस्यों ने कार्यक्रम में उपस्थित रहकर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और आयोजन को सफल बनाने में अपना सहयोग दिया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को भारतीय परंपरा&comma; आधुनिक फैशन और टिकाऊ डिजाइन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का मंच प्रदान किया। साथ ही&comma; हथकरघा को नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने और भारतीय पारंपरिक वस्त्रों को आधुनिक फैशन से जोड़ने की दिशा में भी यह आयोजन महत्वपूर्ण रहा।<&sol;p>&NewLine;

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