हादसे का इंतजार करता फारबिसगंज का पुराना लाल पक्का..!

<p><strong>फारबिसगंज&lpar;चंदन कुमार&rpar;&colon;<&sol;strong> ऐतिहासिक ब्रिटिश काल में निर्मित पुराना लाल पक्का सरकारी तंत्र के लापरवाही के कारण एक बड़ी हादसा होने का इंतजार करता दिख रहा है। वर्तमान में भारतीय पटसन निगम लिमिटेड का अवस्थित कार्यालय परिसर में भले ही हरे-भरे पौधे हो या नहीं हो लेकिन इसी प्रांगण में ब्रिटिश काल के समय बने लाल पक्के के ऊपर मोटे-मोटे पेड़ दीवालों को छेद फल- फूल रहे हैं। जो कभी भी बड़े हादसे होने की तरफ चिल्ला चिल्ला कर इशारा कर रहे हैं&excl; देखने की बात यह है कि आसपास घनी आबादी है शहर का सबसे व्यस्ततम सड़क सदर रोड जिस पर दिन-रात हजारों लोगों का आवागमन जारी रहता है&excl; बिजली का ट्रांसफार्मर जर्जर भवन के ठीक नीचे अवस्थित है&excl; लेकिन इसकी फिक्र ना स्थानीय प्रशासन को है और ना ही अवस्थित पटसन विभाग के अधिकारियों को जानकार बताते हैं कि कई बार पटसन विभाग और स्थानीय प्रशासन का भी ध्यान इस ओर दिलवाया गया लेकिन अधिकारियों को इनसे कोई साहुकार नहीं&period;<&sol;p>&NewLine;<p>ज्ञात हो कि पूर्व में भी फारबिसगंज में इस तरह के बिल्डिंग से कई सारी दिल दहलाने वाली घटनाएं हुई है। हाल में ही पटेल चौक के पास एक बड़े पेड़ गिरने की वजह से मेडिकल शॉप सहित कई दुकाने क्षतिग्रस्त हुई थी साथ ही कुछ वर्ष पहले सदर रोड में छज्जा गिरने से तीन भाइयों की मृत्यु भी इसी तरह की घटना में शामिल है। इन सबके बावजूद फारबिसगंज प्रशासन मूकदर्शक बने हुए है। ऐसा प्रतीत होता है ऐतिहासिक धरोहरों से स्थानीय प्रशासन को कोई मतलब नहीं है फारबिसगंज के ऐतिहासिक सुल्तान पोखर&comma; फारबिसगंज नाका सहित कई ऐसे इमारत हैं जो प्रशासनिक उदासीनता के कारण भावी पीढ़ी की नजरों के सामने से ओझल होते जा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन ऐतिहासिक धरोहरों की देखरेख भगवान भरोसे होती रहेगी और जब कोई अप्रिय घटना हो जाएगी तो प्रशासन और अधिकारी कहेंगे कि हमें तो जानकारी ही नहीं थी।<&sol;p>&NewLine;

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