दानारा में शोक श्रद्धांजलि सभा, विधायक गोपाल रविदास सहित भाकपा (माले) के कई नेता हुए शामिल

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> &&num;8220&semi;पंचम मांझी अमर रहें&&num;8221&semi; और &&num;8220&semi;पंचम मांझी को लाल सलाम&&num;8221&semi; के नारों से गुरुवार को विक्रम प्रखंड के दानारा गांव का माहौल गूंज उठा&period; इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य सह सचिव एवं भाकपा &lpar;माले&rpar; के पटना जिला के सक्रिय युवा नेता कामरेड पंचम मांझी की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण&comma; कार्यकर्ता और पार्टी नेता पहुंचे&period; श्रद्धांजलि देने पहुंचे फुलवारीशरीफ के विधायक कामरेड गोपाल रविदास ने उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया और एक मिनट का मौन रख कर उन्हें नमन किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ज्ञात हो कि 11 जून 2025 को 23 वर्षीय पंचम मांझी का निधन एम्स पटना में हो गया था&period; वे गरीब परिवार से निकलकर अपने संघर्ष&comma; विचारधारा और प्रतिबद्धता से पार्टी में एक अलग पहचान बना चुके थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए भाकपा &lpar;माले&rpar; के महासचिव कामरेड दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि यह सभा केवल शोक की नहीं&comma; बल्कि पंचम मांझी के विचारों और अधूरे सपनों को आगे ले जाने की जिम्मेदारी लेने का क्षण है&period; उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया कि पंचम मांझी की स्मृति में उनके गांव में उनकी प्रतिमा या स्मृति द्वार बनाया जाए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर भाकपा &lpar;माले&rpar; के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद कामरेड रामेश्वर प्रसाद&comma; अंगियाव विधायक कामरेड शिव प्रकाश रंजन&comma; पालीगंज विधायक कामरेड संदीप सौरभ&comma; अरवल विधायक कामरेड महानंद सिंह&comma; बिहार विधान परिषद सदस्य कामरेड शशि यादव&comma; नगहर पंचायत के मुखिया अजीत वर्मा&comma; कामरेड कमलेश&comma; पुनपुन प्रखंड सचिव मोहन प्रसाद&comma; फुलवारी प्रखंड सचिव गुरुदेव दास&comma; धनरुआ प्रखंड सचिव अकलू पासवान&comma; मसौढ़ी प्रखंड सचिव राकेश कुमार&comma; इंकलाबी नौजवान सभा के साथी साधु शरण सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित थे। सभा में वक्ताओं ने पंचम मांझी की राजनीतिक चेतना&comma; नेतृत्व क्षमता और जमीनी संघर्ष को याद करते हुए उनके अधूरे एजेंडे को पूरा करने का संकल्प लिया।<&sol;p>&NewLine;

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