दानापुर में मदरसा यासीनया हुसैनया की भव्य इस्लामी कॉन्फ्रेंस व जलसे का आयोजन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> पटना के दानापुर स्थित मदरसा यासीनया हुसैनया में एक भव्य इस्लामी कॉन्फ्रेंस और जलसे का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन अहमद सुल्तान क़ादरी और सैयद शाह नेहालुद्दीन की देखरेख में किया गया। कॉन्फ्रेंस में पटना के विभिन्न इलाकों से आए उलेमा-ए-इकराम&comma; समाजसेवी और बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इल्म-ए-दीन को बढ़ावा देना और समाज में भाईचारे&comma; आपसी सौहार्द तथा अमन-ओ-चैन को मजबूत करना रहा। अपने संबोधनों में उलेमाओं ने कहा कि इस्लाम इंसानियत&comma; शांति और समाज की भलाई का पैग़ाम देता है&comma; जिसे आम लोगों तक पहुंचाना आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है। कॉन्फ्रेंस के दौरान मदरसा यासीनया हुसैनया के हाफ़िज़ एजाज़ और मदरसे के प्रिंसिपल मुफ़्ती मौलाना औरंगज़ेब के हाथों तीन छात्रों की दस्तारबंदी &lpar;पगड़ी बांधने की रस्म&rpar; अदा की गई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर उलेमाओं ने छात्रों को इल्म-ए-दीन की अहम जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए उन्हें समाज और देश की तरक्की के लिए ईमानदारी व सेवा भाव से काम करने की नसीहत दी। कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख उलेमा-ए-इकराम ने अपने ख़िताब में कहा कि मदरसे केवल तालीम के मरकज़ नहीं हैं&comma; बल्कि समाज को सही राह दिखाने वाले संस्थान भी हैं। उन्होंने युवाओं से शिक्षा&comma; नैतिकता और भाईचारे को अपनाने की अपील की। जलसे का समापन सामूहिक दुआ के साथ हुआ&comma; जिसमें देश में अमन&comma; खुशहाली और आपसी भाईचारे की कामना की गई।<&sol;p>&NewLine;

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