केंद्र के बजट के खिलाफ किसान संघर्ष समिति का जिला मुख्यालय जहानाबाद पर विरोध प्रदर्शन, 17 फरवरी को मुख्यमंत्री घेराव की घोषणा

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&sol;जहानाबाद&comma; अजीत यादव।<&sol;strong> केंद्र सरकार के बजट को किसान विरोधी बताते हुए किसान संघर्ष समिति ने सोमवार 2 फरवरी 2026 को जिला मुख्यालय पर एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन किया और प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सरकार से मांग की कि राजस्व कर्मचारी और पदाधिकारी गांव-गांव&comma; घर-घर जाकर शिविर लगाएं और किसानों की जमीन से जुड़ी समस्याओं का मौके पर समाधान करें&period; किसानों का कहना है कि छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी उन्हें बार-बार जिला और अंचल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है&period; बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं होता और अंचल पदाधिकारी से मिलना तक मुश्किल हो गया है&period; यदि कभी मुलाकात होती भी है तो किसानों को प्राइवेट लोगों और दलालों के पास भेज दिया जाता है&comma; जहां खुलेआम पैसों की मांग की जाती है&period; किसानों ने आरोप लगाया कि पूरा राजस्व तंत्र प्राइवेट दलालों के सहारे चल रहा है&period; धरना दे रहे किसानों ने जिलाधिकारी से इस पूरे मामले पर गंभीरता से ध्यान देने और अंचल पदाधिकारियों व राजस्व कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>किसान संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार किसानों को ठगने का काम कर रही है&period; न तो फसलों की कीमत दोगुनी की गई&comma; न कर्ज माफी हुई और न ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाई गई&period; समिति का कहना है कि बजट में 80 प्रतिशत किसानों को नजरअंदाज करते हुए बेहद कम प्रावधान किए गए हैं&comma; जिससे साफ जाहिर होता है कि सरकार किसानों की नहीं बल्कि कारोबारियों की सरकार बनकर रह गई है। संगठन ने कहा कि राजस्व कर्मचारी और पदाधिकारी किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं और जमीन से जुड़े कार्यों में अवैध वसूली की जा रही है&period; बड़ी संख्या में किसानों की जमाबंदी आज भी पूर्वजों के नाम पर है&period; दखल-खारिज&comma; एलपीसी और अन्य राजस्व कार्य वर्षों से लंबित पड़े हैं&period; कई किसानों के परिवार में दो पीढ़ियां गुजर जाने के बावजूद नामांतरण नहीं हो सका है&comma; जिसके कारण उन्हें किसान पंजीयन कराने और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो रही है&period; अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाते-लगाते किसानों के पैर घिस गए हैं&comma; लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>किसान संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि जनता दरबार के दिन भी कई अंचलाधिकारी कार्यालय से अनुपस्थित रहते हैं और दलालों के जरिए अवैध वसूली कराई जाती है&period; कुछ मामलों में यदि दखल-खारिज होता भी है तो किसानों से मोटी रकम ली जाती है&period; धान की खरीद को लेकर भी किसानों में भारी आक्रोश है&comma; क्योंकि उन्हें औने-पौने दाम पर व्यापारियों को फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है&period; संगठन ने कहा कि इन हालातों में आंदोलन ही किसानों के पास एकमात्र रास्ता बचा है। किसान संघर्ष समिति ने ऐलान किया कि 17 फरवरी को मुख्यमंत्री का घेराव किया जाएगा&period; इससे पहले गांव-गांव जाकर किसान संवाद यात्रा के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जाएगा&period; विरोध प्रदर्शन की अध्यक्षता जर्मन यादव&comma; सिद्धनाथ कुमार&comma; सतीश सिंह&comma; विजय सिंह&comma; उमाशंकर सिंह&comma; सुधीर यादव&comma; पशुराम सिंह&comma; नरेश सिंह यादव&comma; सूर्यदेव पासवान&comma; श्यामदेव प्रसाद यादव&comma; विमल यादव&comma; नागेंद्र पासवान&comma; वीरेंद्र सिंह&comma; मंजय कुमार&comma; राजेंद्र यादव&comma; सरजू प्रसाद&comma; रविरंजन कुमार&comma; डॉ महबूब आलम अंसारी&comma; हेमंत कुमार सिंह&comma; इंदू देवी और वाल्मीकि राय सहित बड़ी संख्या में किसान नेता और सदस्य मौजूद रहे।<&sol;p>&NewLine;

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