शब-ए-मेराज की रात जगमग रहे खानकाह, रात भर इबादत में मशगूल रहे लोग

<p><strong>फुलवारीशरीफ&lpar;अजित यादव&rpar;&colon;<&sol;strong> हर दुआओं को कुबूल होने और बड़े ही फजीलत वाली रात शब ए मेराज को लेकर प्रसिद्ध खानकाह ए मुजिबिया रंगबिरंगी रौशनी में नहाया रहा । माह रज्जब-उल-मुरज्जब की 27 वीं शब रात जिसे शब-ए-मेराज कहा जाता है। इस दौरान मुस्लिम धर्मावलंबियों ने रातभर जागकर घर व मस्जिदों में अल्लाह की इबादत की । इससे पहले लोगो ने रोजा भी रखा और अल्लाह से सुकून व तरक्की खुशहाली की दुआएं मांगी।माना जाता है कि शब ए मेराज की रात को मांगी दुआएं कभी खाली नही जाती है । घरों में महिलाएं बच्चे और बुजुर्गों में शब के मेराज को लेकर खासा उत्साह का माहौल रहा&period;<&sol;p>&NewLine;<p>खानकाह ए मुजिबिया फुलवारी शरीफ के प्रबंधक हजरत मौलाना मिन्हाजूद्दीन मुजीबी ने बताया कि अल्लाह ने अपने सबसे प्यारे नबी हजरत मोहम्मद &lpar;स &rpar; को शब ए मेराज की रात अता फरमाई यानी कि पैगंबर हजरत मोहम्मद &lpar;स &rpar; को अपने करीब आने का मौका दिया। उन्होंने कहा कि 27 रज्जब की रात फरिश्ते हजरत जिबरैल आए और उन्हें अल्लाह के हुक्म से बुर्राक की सवारी में आसमानों की सैर कराई। इस रात अल्लाह ने अपने नबी का पास बुलाया और एक बड़ा तोहफा नमाज के रूप में दिया। इसी रात अल्लाह ने अपने प्यारे नबी पैगंबर हजरत मोहम्मद &lpar;स &rpar; के मार्फत मुसलमानों पर पांच वक्त की नमाज पढ़ना फर्ज &lpar;अनिवार्य&rpar; करार दिया।मौलाना ने कहा कि अपने बुजुर्गों महिलाओं का विशेष रूप में सम्मान देने का पैगाम हर वलिदान को अपने बच्चों में देना चाहिए । नमाज अदा करने से बड़ी फजीलत मिलती है जो इस शब ए मेराज की रात अल्लाह ने हुक्म ऐडा किया है।<&sol;p>&NewLine;

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