एनसीवीबीडीसी की संयुक्त निदेशक ने किया कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>शुक्रवार को एनसीवीबीडीसी की संयुक्त निदेशक डॉ&period; छवि पंत जोशी ने राज्य में कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा बैठक क़ी&period; बैठक का आयोजन राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज&comma; अगमकुआँ में किया गया&period; इस दौरान डॉ&period; छवि पन्त जोशी ने स्पष्ट कहा कि राज्य में कालाजार के केस पहले की तुलना में कम प्रतिवेदित हो रहे हैं लेकिन सभी को अलर्ट रहकर संदिग्ध कालाजार मरीजों को खोजने की जरुरत है&period; इस अवसर पर अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी&comma; वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम&comma; आरएमआरआईएमएस के निदेशक डॉ&period; कृष्णा पांडेय&comma; वरीय क्षेत्रीय निदेशक&comma; क्षेत्रीय कार्यालय&comma; स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय&comma; भारत सरकार&comma; डॉ&period; रवि शंकर सिंह&comma; विश्व स्वास्थ्य संगठन&comma; नयी दिल्ली से डॉ&period; पल्लिका सिंह&comma; विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्टेट एनटीडी कोऑर्डिनेटर डॉ&period; राजेश पांडेय&comma; एनसीवीबीडीसी एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन की राष्ट्रीय टीम के सदस्य&comma; पटना&comma; वैशाली&comma; मुजफ्फरपुर&comma; गोपालगंज&comma; सारण तथा सिवान के वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी एवं उनकी टीम तथा सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि के साथ अन्य उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सभी अलर्ट रहकर संदिग्ध कालाजार मरीजों की करें खोज&colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डॉ&period; जोशी ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि कालाजार कर्मियों का नियमित क्षमतावर्धन किया जाए ताकि वह अपने काम बेहतर तरीके से कर सकें&period; उन्होंने कहा कि इस तरह की बैठक सह कार्यशाला क्षेत्रीय स्तर पर भी होनी चाहिए जिससे काम को बेहतर सामंजस्य के साथ किया जा सके&period; उन्होंने कहा कि डोसियर बनाना एक जिम्मेदारी का काम है और प्रखंड&comma; जिला एवं राज्य स्तर पर इसे सही तरीके से पूरा किया जाना है&period; उन्होंने सहयोगी संस्थानों को भी पूरी दक्षता के साथ कालाजार उन्मूलन अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने को कहा। अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी&comma; वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राज्य में कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम की स्थिति बताई&period; उन्होंने कहा कि प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक बेहतर कार्ययोजना बनाकर आईआरएस एवं डोसियर के दस्तावेजीकरण करने की बात कही&period; उन्होंने कहा कि सभी को अपनी कार्यशैली में सुधार लाने की जरुरत है जिससे 2027 तक देश सहित राज्य कालाजार मुक्त हो सके&period; उन्होंने बताया कि अभी तक 23 जिलों ने डोसियर के दस्तावेजीकरण का काम पूरा किया है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आरएमआरआईएमएस के निदेशक डॉ&period; कृष्णा पांडेय ने कहा कि राज्य कालाजार उन्मूलन लक्ष्य के काफी करीब है लेकिन सभी को सचेत रहने की जरुरत है&period; उन्होंने बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्मूलन के बाद भी वहां कालाजार के केस मिले हैं&period; उन्होंने सटीकता से ससमय डोसियर को पूरा करने की बात कही&period; विश्व स्वास्थ्य संगठन&comma; नयी दिल्ली की डॉ&period; पल्लिका सिंह ने टीम द्वारा समस्तीपुर&comma; वैशाली&comma; नालंदा एवं मुजफ्फरपुर में भ्रमण के बाद पाए गए वस्तुस्थिति की चर्चा की और इसमें सुधार लाने की जरुरत पर बल दिया&period; क्षेत्रीय कार्यालय&comma; स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय&comma; पटना के डॉ&period; रवि शंकर सिंह ने भ्रमण के दौरान आईआरएस के दौरान पायी गयी कमियों की चर्चा की और सुधार के उपाय बताए। बैठक सह कार्यशाला का संचालन करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्टेट एनटीडी कोऑर्डिनेटर डॉ&period; राजेश पांडेय ने कहा कि जल्द से जल्द डोसियर दस्तावेजीकरण का कार्य पूरा करना सभी जिलों एवं राज्य की जिम्मेदारी है और इसमें सबका सहयोग आवश्यक है&period; इस अवसर पर सभी जिलों के वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी एवं उनकी टीम वर्चुअल माध्यम से जुड़ कर अपनी बात रखी।<&sol;p>&NewLine;

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