महावीर मंदिर में धूमधाम से मनाई गई जानकी नवमी, 24 घंटे का अष्टयाम कीर्तन शुरू

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> राजधानी पटना स्थित महावीर मंदिर में शनिवार को जानकी नवमी का पर्व पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। पूजा के यजमान पुजारी दिनदयाल रहे&comma; जबकि पुरोहित के रूप में पंडित जटेश झा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान संपन्न कराया। पूजा के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मान्यता है कि भगवान श्रीराम के अवतार दिवस रामनवमी के एक माह बाद माता सीता के अवतरण दिवस के रूप में जानकी नवमी मनाई जाती है। इसी परंपरा के तहत मंदिर में स्थापित सीताराम की विवाह-मूर्ति के समक्ष प्रातःकाल विशेष पूजा की गई।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पूजा के बाद मंदिर में 24 घंटे का &OpenCurlyQuote;अष्टयाम कीर्तन’ प्रारंभ हुआ&comma; जिसमें भक्ति गीतों और मंत्रों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो गया। कीर्तन का मुख्य मंत्र— &OpenCurlyDoubleQuote;जनकसुता जग जननि जानकी। अतिसय प्रिय करुनानिधान की॥ ताके जुग पद कमल मनावउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ॥”— लगातार गूंजता रहा। पंडित भवनाथ झा के अनुसार धर्मशास्त्रों में जानकी नवमी के दिन व्रत एवं विशेष पूजा का विधान बताया गया है। उन्होंने बताया कि बृहद्-विष्णु पुराण तथा अन्य ग्रंथों में भी इस तिथि के महत्व का उल्लेख मिलता है। श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने बताया कि मंदिर में सभी त्योहारों और अनुष्ठानों का आयोजन निर्धारित परंपरा और विशेष कैलेंडर के अनुसार किया जाता है। उन्होंने कहा कि भक्तों को मंदिर में होने वाले धार्मिक आयोजनों का बेसब्री से इंतजार रहता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार&comma; महावीर मंदिर में हर छोटे-बड़े त्योहार को पूरे विधि-विधान और भव्यता के साथ मनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।<&sol;p>&NewLine;

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