त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला में बच्चों तथा आचार्यों के सर्वांगीण विकास पर हुआ चिंतन-मंथन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारी शरीफ&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> राजधानी पटना के उदासीन नानकशाही सरस्वती विद्या मंदिर&comma; फुलवारी श्री में आयोजित त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला शिक्षा जगत में नए विचारों और रणनीतियों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनी। यह कार्यशाला विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की प्रांतीय इकाई भारतीय शिक्षा समिति&comma; बिहार के तत्वावधान में संपन्न हुई&comma; जिसमें आचार्यों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यशाला का शुभारंभ एवं मुख्य अतिथियों की उपस्थिति कार्यशाला का शुभारंभ शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों एवं स्थानीय प्रबंधकारिणी समिति के अधिकारियों के कर-कमलों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। इस अवसर पर पूर्व प्रखंड प्रमुख कमलेश कान्त चौधरी&comma; पटना विभाग के विभाग प्रमुख राजेश कुमार&comma; भारतीय शिक्षा समिति&comma; बिहार के सेवा कार्य प्रमुख गंगा चौधरी&comma; अध्यक्ष शंकर गुप्ता&comma; पैक्स अध्यक्ष राजीव जी&comma; सचिव रवि प्रकाश&comma; सह सचिव सहजानन्द प्रकाश&comma; कोषाध्यक्ष संजय कुमार&comma; उपाध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद सहित कई गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे। विद्यालय के प्रधानाचार्य सुसुम यादव ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान किया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यशाला के उद्देश्य और महत्व प्रधानाचार्य सुसुम यादव ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य विगत वर्ष की कार्य योजना की समीक्षा एवं नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा करना था&comma; जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मुख्य अतिथि कमलेश कान्त चौधरी ने कहा कि त्रिदिवसीय कार्यशाला के दौरान आचार्य आत्ममंथन करेंगे और विद्यार्थियों के बौद्धिक&comma; शारीरिक&comma; मानसिक और नैतिक विकास के नए आयाम तलाशेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि एक आचार्य की असली पहचान उसके स्वाध्याय से होती है&comma; और यदि आचार्य स्वयं अध्ययनशील नहीं है तो वह विद्यार्थियों का समुचित विकास नहीं कर सकता।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>नई शिक्षा नीति और आचार्यों की भूमिका विभाग प्रमुख राजेश कुमार ने शिक्षा के बदलते परिदृश्य और नई शिक्षा नीति-2020 के आलोक में आचार्यों के समर्पित योगदान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आचार्यों को निरंतर नवाचारों और शैक्षणिक परिवर्तनों के साथ अद्यतन रहना होगा&comma; जिससे विद्यार्थियों को एक उन्नत और समृद्ध शैक्षणिक वातावरण मिल सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यशाला में भाग लेने वाले आचार्य इस कार्यशाला में विद्यालय के आचार्य राज कुमार दूबे&comma; अजय कुमार&comma; प्रमोद पाण्डेय&comma; पूनम कुमारी&comma; नीलम कुमारी&comma; रुपम रानी&comma; नूतन कुमारी&comma; रिमझिम रौशन&comma; चंदन सहित कई अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>शिक्षा प्रणाली में नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम त्रिदिवसीय कार्यशाला शिक्षा प्रणाली में नवाचार और समग्र विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। इस कार्यशाला से प्राप्त विचारों और निष्कर्षों से न केवल आचार्यों को मार्गदर्शन मिलेगा&comma; बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह खबर पूरी तरह से त्रिदिवसीय आचार्य कार्यशाला के मुख्य बिंदुओं को समाहित करते हुए विस्तृत रूप से तैयार की गई है।<&sol;p>&NewLine;

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