इमारत-ए-शरिया ने असम-ओडिशा में राहत अभियान शुरू किया, वंदे मातरम कानून पर जताई आपत्ति

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत। <&sol;strong>इमारत-ए-शरिया बिहार&comma; ओडिशा&comma; झारखंड एवं पश्चिम बंगाल ने एक ओर असम और ओडिशा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य के लिए दो विशेष टीमें रवाना करने की घोषणा की है&comma; वहीं दूसरी ओर वंदे मातरम से जुड़े प्रस्तावित कानून पर गंभीर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार से इसकी समीक्षा कर इसे वापस लेने की मांग की है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अमीर-ए-शरियत बिहार&comma; ओडिशा&comma; झारखंड एवं पश्चिम बंगाल मौलाना सैयद अहमद वली फैसल रहमानी ने वंदे मातरम से संबंधित प्रस्तावित कानून पर चिंता व्यक्त की&period; उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को अपने धार्मिक विश्वासों के अनुसार जीवन जीने और आस्था का पालन करने का अधिकार देता है&period; उनके अनुसार&comma; वंदे मातरम के कुछ अंश इस्लाम के एकेश्वरवाद के सिद्धांत से मेल नहीं खाते&comma; इसलिए इसे अनिवार्य बनाने का कोई भी प्रयास धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और धार्मिक स्वतंत्रता की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इमारत-ए-शरिया प्रधान मुख्यालय&comma; फुलवारी शरीफ में आयोजित बैठक में नाज़िम मौलाना मुफ्ती मुहम्मद सईद-उर-रहमान कासमी ने बताया कि असम और ओडिशा के कई जिले भीषण बाढ़ से प्रभावित हैं&comma; जहां लाखों लोग कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं&period; प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 10-10 सदस्यों की दो अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं&period; असम जाने वाली टीम का नेतृत्व सहायक नाज़िम मौलाना अहमद हुसैन कासमी मदनी करेंगे&comma; जबकि ओडिशा जाने वाली टीम की जिम्मेदारी मौलाना अब्दुल अल्लाह अनस कासमी को सौंपी गई है&period; दोनों टीमें स्थानीय प्रशासन एवं जिम्मेदार लोगों के सहयोग से राहत सामग्री का वितरण करेंगी&period;बैठक में बाढ़ पीड़ितों की सहायता को धार्मिक&comma; मानवीय और नैतिक दायित्व बताते हुए समाज के सक्षम लोगों से बढ़-चढ़कर सहयोग करने और प्रभावित लोगों के लिए दुआ करने की अपील की गई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>वहीं नाज़िम मौलाना मुफ्ती मुहम्मद सईद-उर-रहमान कासमी ने कहा कि धार्मिक आस्था प्रत्येक व्यक्ति की सबसे मूल्यवान पूंजी है&period; उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि यदि ऐसा कोई कानून लाया गया है या प्रस्तावित है&comma; तो उसकी समीक्षा कर संवैधानिक मूल्यों और धार्मिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए&period; इमारत-ए-शरिया ने इस मुद्दे पर सरकार से पुनर्विचार करने और सभी समुदायों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की अपील की।<&sol;p>&NewLine;

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