जेकेएम सड़क निर्माण कंपनी के नाम पर क्षेत्र में जोरों से चल रही है अवैध मिट्टी खनन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon;<&sol;strong> बाढ़ प्रभावित क्षेत्र नरपतगंज प्रखंड के अंचरा&comma; घूरना&comma;के सुरसर नदी किनारे तथा सोनापुर के चकोरवा&comma; जिमराही&comma;सोनापुर बूढ़ी नदी के किनारे तथा फारबिसगंज प्रखंड क्षेत्र के मीरगंज के परमान नदी के आसपास धड़ल्ले से खनन माफियाओं के द्वारा सड़क निर्माण कंपनी जेकेएम के नाम पर प्रत्येक दिन जेसीबी एवं पोकलेन मशीन लगाकर 5 से 10 फीट गड्ढा कर मिट्टी निकाल लिया जाता है। निकाल कर अपने मनमाफिक दामों में मिट्टी को बेच दिया जाता है&comma; जबकि स्थानीय लोगों के द्वारा स्थानीय थाना एवं संबंधित अंचल पदाधिकारी तथा जिला खनन पदाधिकारी को सूचना दिया जाता है&comma; परंतु विभागीय लापरवाही एवं उदासीनता के कारण खनन माफिया बेखौफ होकर धड़ल्ले से खनन करते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि खनन माफियाओं के संदर्भ में पदाधिकारी को जब मोबाइल के माध्यम से सूचना दिया जाता है&comma; तो उन्होंने टालमटोल कर खानापूर्ति कर लेते हैं। यह भी खुलासा किया कि खनन माफियाओं के द्वारा पदाधिकारी को मोटी रकम पहुंचाया जाता है। इसी वजह से माफियाओं के विरुद्ध पदाधिकारियों के द्वारा कार्यवाही नहीं की जाती है।<br>ग्रामीणों की शिकायत पर संवाददाता के द्वारा उक्त स्थानों पर जब जायजा लेने गया तो देखा कि खनन माफिया निर्भीक&comma; बेखौफ होकर नियम को ताक पर रखकर धड़ल्ले से खनन कर रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार जब संवाददाता ने खनन करा रहे हैं व्यक्ति से मोबाइल के माध्यम से पूछा तो उन्होंने बताया कि यह मिट्टी सड़क निर्माण कंपनी जेकेएम का है। जो खनन पदाधिकारी को मैनेज करके मिट्टी निकलने की बात बताया हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>क्या कहते हैं खनन पदाधिकारी अररिया&comma; लाल बिहारी प्रसाद-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस बाबत श्री प्रसाद ने बताया कि हम 3 जिले के प्रभार में है अररिया&comma; किशनगंज&comma; पूर्णिया&comma; हम अकेले क्या कर सकते हैं&quest; क्षेत्र में संबंधित अंचल के सीओ तथा थाना प्रभारी क्षेत्र में है&comma; उनको भी चाहिए खनन माफिया पर कार्यवाई करें। कुल मिलाकर देखा जाए तो संबंधित सभी पदाधिकारी चाहते हैं कि हर वर्ष बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ आता रहे&comma; और सब मिलकर बाढ़ के नाम पर लूटते रहे। कहीं पर सड़क भरने को लेकर तो कहीं बांध बनाने को लेकर तो कहीं राहत के नाम पर&comma; ऐसा प्रतीत होता है&comma; कि पदाधिकारी इसी फिराक में लगे हुए हैं।<&sol;p>&NewLine;

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