रहमतों की रात होलिका दहन और शब ए बारात एक साथ

<p><strong>फुलवारीशरीफ&lpar;अजित यादव&rpar;&colon;<&sol;strong> गंगा जमुनी तहजीब को अपने जर्रे जर्रे में समेटे हिन्द की धरती आज भी पूरी दुनिया मे सौहार्द अमन भाईचारे के साथ खुशहाली का पैगाम दे रही है। सूफी संतों की धरती फुलवारी शरीफ में हिन्दू मुस्लिम समाज के लोग एक साथ होलिका दहन और शब ए बारात का पर्व शांतिपूर्ण माहौल में मना रहे हैं । एक तरफ देर शाम शहर व ग्रामीण इलाके में होलिका दहन किया गया। इसको लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। होलिका दहन के समय ढोल नगारे झाल बजाकर होली के फगुआ गीतों की गूंज पर लोग झुमते गाते रहे । वहीं&comma; कल 29 मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा। वहीं बुजुर्गो की कब्रो और मजारो पर रौशनी कर फातेहा पढ़ी गयी । साथ ही मगफिरत की दुआए मांगी गयी। शब-ए-बारात सिर्फ गुनाहों की माफ़ी और मरहूमों के लिए दुआओं की रात नहीं है&comma; बल्कि कौन पैदा होगा&comma; किसकी इस दुनिया से रुखसती होगी&period; किसे दुनिया में क्या हासिल होगा&period; कितनी रोजी मिलेगी&period; किसके गुनाह बख्श दिए जाएंगे&period; यानी हर मुसलमान की तकदीर इस रात तय हो जाएगी&comma; ऐसा माना जाता है कि इस रात सिर्फ गुनाह ही माफ़ नहीं होंगे&comma; बल्कि अल्लाह द्वारा अपने हर बंदे के लिए साल भर में होने वाले काम बांट दिए जाएंगे&period; पूरे साल का हिसाब-किताब भी अल्लाह द्वारा इस रात को किया जाएगा&period;सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि जो दुनिया से जा चुके हैं&period; उनके लिए भी दुआएं मांगी जाती हैं&period; खुद के लिए उनसे माफ़ी मांगते हैं और उन्हें जन्नत नसीब हो&comma; उनकी रूह को सुकून मिले&comma; इसके लिए अल्लाह से दरख्वास्त करते हैं&period; इसीलिए कब्रिस्तान जाकर अपने पूर्वजों की कब्र से रोशनी करते हैं&period; फूल मालाएं चढ़ाते हैं&period; शब ए बारात को लेकर सभी मस्जिदों व कब्रिस्तानों को सजाया गया है। लोग अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर उनके गुनाहों की माफी अल्लाह से मांग रहे हैं। गुनाहों को माफ करने के लिए इबादत कर अल्लाह से दुआ की और कुरान शरीफ की तिलावत करते रहे । गुनाहों से निजात की रात में अकीदमंदो ने खुदा से सच्चे दिल से तौबा की।अपने और परिवार के लिए खुदा से खुशहाली मांगी। इस दौरान इबादतगाहों में नमाज व फातेहा पढ़ीं गयीं । कब्रिस्तानो में बुजुर्गो की कब्र पर रोशनी कर जन्नत की ख्वाहिश जताई&period;<&sol;p>&NewLine;<p>ऐसी मान्यता है जिंदगी व मौत का लेखा जोखा शब-ए-बारात की रात होता है। इस रात हर दुआ कबूल होती है। अल्लाह ताला गुनाह माफ करते हैं। किसे क्या देना है यह भी तय होता है। इसलिए तहेदिल मुसलमान इस पूरी रात अल्लाह ताला की इबादत करते हैं। कहा जाता है की इस रात एक घड़ी ऐसी आती है जो मकबूलियत की होती है &vert; उस लमहा हर मांगने वाले की दुआ जरूर कबूल होती है &vert; लोग अपने गुनाहों को माफ कराने के लिए अल्लाह के सामने हाथ फैलाकर गिड़गिड़ाते हैं। वहीं रात के अंतिम समय में लोग सेहरी खाकर दूसरे दिन रखे जाने वाले रोजे की नीयत करते हैं । लोग रातभर इबादत में मशगूल रहे । लोगो ने विशेष नमाजें अदा की ।बच्चों में इस त्योहार को लेकर खासा उत्साह था &vert; तमाम मस्जिदों और कब्रिस्तानों में रात भर अपने पूर्वजो की मजारो पर गुनाहों की माफ़ी मगफिरत की दुआ मांगने के लिए भारी संख्या में मुस्लिम समुदाय की भीड़ जुटी रही &vert; शव ए बारात को लेकर मस्जिदों और कब्रिस्तानो को बिजली के रंग बिरंगी बल्बों से आकर्षक ढंग से सजाया गया था&period;<&sol;p>&NewLine;<p>शाम होते ही घरों व मस्जिदों से कुरआन की तिलावत करने की आवाज सुनाई देने लगी । महिलाऐं जहां घरों में ही इबादत व तिलावत में लीन रहीं वहीं पुरूष ने मस्जिदों में जाकर विशेष नमाज अदा की &vert; पर्व को लेकर शाम से ही मस्जिदों&comma; दरगाहों में लोगों का आनेजाने का सिलसिला शुरू हो गया जो सिलसिला रातभर चलता रहा । एक तरफ जहां बच्चे आतिशबाजी में मशगुल रहे वहीं दूसरी तरफ लोग अपने घरों के पूर्वज की याद में फातिया व कुरानखानी कराने में मशगुल रहे &vert; महिलाएं भी घरों में कुरान शरीफ की तिलावत में जुटी रही &vert; वहीँ पर्व को लेकर तरह के तरह के व्यंजन हलवा कतली आदि बनाकर मेहमानों को परोसा गया &vert; शब ए बारात की रात राजधानी के फुलवारी शरीफ और आस पास के तमाम मुस्लिम इलाके गुलजार रहे &vert; राजधानी के मुस्लिम बहुल ईलाको पटना के सब्जीबाग़ &comma; पीर दमडिया &comma; फ़क़ीरबाड़ा &comma; सुल्तानगंज &comma; राजा बाजार &comma; समनपूरा &comma; शेखपुरा &comma;हमीदपुर कुर्जी &comma; बांस कोठी &comma; संगम कोलोनी &comma; मैनपुरा &comma; दुजरा &comma;लालकोठी दानापुर &comma;सुल्तानपुर &comma; सगुना मोड़ &comma; छोटी खगौल व बड़ी खगौल &comma; जमालुद्दीन चक &comma; दीघा &comma; चितकोहरा &comma; पहाडपुर &comma;अनीसाबाद &comma; फुलवारी शरीफ के प्रसिद्ध खानकाह ए मुजिबिया &comma; काजी नगर कोलोनी &comma; अहमद कोलोनी &comma; मिन्हाज नगर &comma; शाही संगी मस्जिद &comma; मिल्लत कोलोनी &comma; महत्वाना&comma; लाल मियाँ की दरगाह &comma; मिलकियाना &comma; ईसापुर &comma; खलीलपूरा सबजपूरा &comma; नया टोला&comma; बोली मोहल्ला &comma; कर्बला &comma; गुलिस्तान महल्ला &comma; मिल्लत कोलोनी &comma; नोहसा &comma; परसा बाजार &comma; अब्दुल्लाह चक जानीपुर &comma; अकबरपुर &comma; बेउर &comma; भुसौला दानापुर समेत आस पास के तमाम ग्रामीण व शहरी एरिया में मुस्लिम बहुल इलाकों में चहल पहल का माहौल देखा गया &vert; मस्जिदों में विशेष नमाज अदा करने और कब्रिस्तानो में फातिहा पढने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी । वहीं होली की तैयारियों में लोग होलीका दहन कर खुशहाली की कामना की। वहीं घरों में कचरी भाजी बचका के साथ कई तरह के पकवानों का तुत्फ़ उठाने में लगे रहे । ऐसा माना जाता है की तमाम बुराइयां भी होलिका दहन के साथ अग्नि में जलकर भष्म हो जाती है&period;<&sol;p>&NewLine;<p>वहीं होलिका दहन के दौरान आग में चना&comma; मटर आदि के पकवान डालने की भी परंपरा को लोगो को निभाते देखा गया है। माना जाता है होलिका दहन के धुएं से शुभ फल मिलता है&period; साथ ही साथ मन से बुराइयां भी दूर होती है&period; शब ए बारात के दूसरे दिन मुस्लिम धर्मावलंबियों के मानने वाले रोजा रखेंगे वहीं होलिका दहन के दुसरे दिन हिन्दू समाज के लोग रंगों उमंगों का त्यौहार होली की मस्ती में सराबोर रहेंगे&period; वहीं होलिका दहन और शब ए बारात को लेकर पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की गाड़ियां लगातार गश्त लगाती रही।<&sol;p>&NewLine;

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