एम्स पटना में अब फोरेंसिक की पढ़ाई होगी और अधिक व्यवहारिक, छात्रों को मिलेगा अदालत जैसा प्रशिक्षण

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत<&sol;strong>। एम्स पटना ने मेडिकल शिक्षा को नई तकनीक और व्यवहारिक प्रशिक्षण से जोड़ते हुए फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में दो नई सुविधाएं शुरू की हैं&period; इनमें आधुनिक फोरेंसिक संग्रहालय और मूट कोर्ट शामिल हैं&period; इन दोनों के माध्यम से मेडिकल छात्र अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे&comma; बल्कि वास्तविक मामलों से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी समझ सकेंगे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फोरेंसिक संग्रहालय में ऐसे कई शैक्षणिक नमूने रखे गए हैं जिनकी मदद से छात्र शरीर की चोटों&comma; विषैले पदार्थों&comma; अपराध से जुड़े साक्ष्यों और पोस्टमार्टम से संबंधित विषयों का अध्ययन आसानी से कर सकेंगे&period; इससे कठिन विषयों को समझना पहले की तुलना में अधिक सरल होगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मूट कोर्ट को बिल्कुल अदालत की तरह तैयार किया गया है&period; यहां मेडिकल छात्र और रेजिडेंट डॉक्टर यह सीखेंगे कि किसी न्यायालय में फोरेंसिक विशेषज्ञ किस प्रकार अपनी राय रखते हैं&comma; सवालों का जवाब देते हैं और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं&period; इससे भविष्य में मेडिको-लीगल मामलों में उनकी भूमिका अधिक प्रभावी हो सकेगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल ने कहा कि आज चिकित्सा क्षेत्र में केवल सैद्धांतिक जानकारी पर्याप्त नहीं है&period; विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण देना भी जरूरी है&period; उन्होंने विश्वास जताया कि यह नई पहल छात्रों के ज्ञान और आत्मविश्वास दोनों को मजबूत करेगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>चिकित्सा अधीक्षक प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; प्रशांत कुमार सिंह ने कहा कि संस्थान लगातार ऐसी सुविधाएं विकसित कर रहा है&comma; जिससे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके&period; उनका कहना था कि नई व्यवस्था भविष्य के डॉक्टरों को बेहतर पेशेवर क्षमता विकसित करने में मदद करेगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; अमित पाटिल ने बताया कि संग्रहालय में रखी गई सामग्री को इस तरह व्यवस्थित किया गया है ताकि छात्र हर विषय को आसानी से समझ सकें&period; वहीं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ&period; तोशल डी&period; वानखेड़े ने बताया कि कई प्रदर्शों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं&period; इन्हें मोबाइल से स्कैन करने पर संबंधित विषय की विस्तृत वैज्ञानिक जानकारी तुरंत उपलब्ध हो जाएगी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एम्स पटना का यह नया प्रयास चिकित्सा शिक्षा को अधिक आधुनिक&comma; तकनीक आधारित और व्यवहारिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है&period; इससे न केवल मेडिकल छात्रों को लाभ मिलेगा&comma; बल्कि फोरेंसिक मेडिसिन और मेडिको-लीगल शिक्षा के क्षेत्र में भी संस्थान की पहचान और मजबूत होगी&period;यदि चाहें तो मैं इसी विषय पर पूरी तरह अलग एंगल से भी खबर लिख सकता हूँ&comma; जैसे &&num;8220&semi;छात्रों को अदालत जैसी ट्रेनिंग मिलेगी&&num;8221&semi; या &&num;8220&semi;डिजिटल तकनीक से बदलेगी फोरेंसिक की पढ़ाई।<&sol;p>&NewLine;

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