परिवार नियोजन सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं, पुरूषों की सक्रिय भागीदारी जरूरी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर<&sol;strong> अररिया राज्य के उच्च प्रजनन दर वाले जिलों की सूची में शामिल है। तेजी से बढ़ती जनसंख्या जिले के लिये एक चुनौती बन चुका है। जिले का कुल प्रजनन दर यानी टीएफआर 4 है। यानी प्रति परिवार महिलाएं औसतन 04 बच्चों को जन्म दे रही हैं। बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। इसमें परिवार नियोजन कार्यक्रम व लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित कराने की पहल शामिल है। इसके अलावा नियमित अंतराल पर विशेष अभियान संचालित करते हुए जिले में जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयासों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में 11 जुलाई से 31 जुलाई के बीच संचालित सेवा पखवाड़ा के तहत जिले में कुल 415 महिलाओं का सफल बंध्याकरण संभव हो सका।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>विशेष अभियान में 415 महिलाओं का बंध्याकरण<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>जिले में 27 जून से 31 जुलाई तक दो चरणों में संचालित जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा के दूसरे चरण सेवा पखवाड़ा संबंधी उपलब्धियों की जानकारी देते हुए डीपीसी सौरव कुमार ने बताया कि सेवा पखवाड़ा के तहत 415 महिलाओं का सफल बंध्याकरण हुआ। वहीं आइयूसीडी 173&comma; पीपीआईयूसीडी 559&comma; 1298 महिलाओं को अंतरा इंजेक्शन लगाया गया। इस दौरान जिले में करीब 53 हजार कंडोम वितरित किये गये&comma; वहीं 7138 माला एन&comma; 7385 छाया व 2354 आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियां वितरित किये जाने की जानकारी उन्होंने दी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>बढ़ानी होगी पुरूषों की भागीदारी<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>सदर अस्पताल के वरीय चिकित्सक ने कहा कि जनसंख्या स्थिरीकरण के प्रयासों को अधिक प्रभावी व उपयोगी बनाने के लिये इसमें पुरूषों की भागीदारी जरूरी है। लेकिन अभी भी इसमें पुरूषों की भागीदारी बेहद सीमित है। जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि भ्रम व गलत धारणाएं परिवार नियोजन में पुरूषों की भागीदारी को सीमित करता है। जागरूकता के कमी की वजह से अभी ये धारणाएं बनी हुई है। यौन क्षमता व मर्दानगी का ह्रास&comma; सामाजिक व सांस्कृतिक दबाव&comma; डर व अनिश्चितता ऐसी कुछ वजहें हैं। जो समाज में अभी भी जड़ जमाये हुए है। जो निराधार व निरर्थक हैं। अपने परिवार की खुशहाली व समृद्धि के लिये इन गलत धारणाओं के प्रति पुरूषों का जागरूक होना जरूरी है।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>नियोजन सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप ने परिवार नियोजन को लेकर समाज में अभी भी एक गलत धारणा व्याप्त है। ये सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं। पुरूषों को भी इसमें सामान्य रूप से अपनी भागीदारी निभाने की जरूरत है। पुरूषों की भागीदारी से परिवार व समाज पर इसका साकारात्मक असर पड़ेगा। लैंगिक समानता बढ़ेगी। दंपति के बीच जिम्मेदारियों के समान बंटवारा से दोनों के स्वास्थ्य स्थितियों में सुधार होगा। यौन संचारित रोगों के प्रसार में कमी आयेगी। इसलिये परिवार नियोजन सेवाओं को अधिक व्यापक व प्रभावी बनाने के लिये पुरूषों की भागीदारी को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नसबंदी के लिये पुरुष लाभार्थी को 3000 रुपये व महिला बंध्याकरण के लिए लाभार्थी को 2000 रुपये का प्रोत्साहन सरकार द्वारा दिया जाता है।<&sol;p>&NewLine;

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