क्लाइमेट चेंज बन रहा चुनावी मुद्दा, ग्रीन राजनीति ही भविष्य की दिशा : डॉ. अतुल मलिकराम

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> राजनीतिक रणनीतिकार डॉ&period; अतुल मलिकराम ने कहा है कि भारत की राजनीति में अब क्लाइमेट चेंज केवल पर्यावरण तक सीमित विषय नहीं रहा&comma; बल्कि यह एक उभरता हुआ और निर्णायक चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है&period; उन्होंने कहा कि ग्रीन राजनीति की रणनीति विकास के खिलाफ नहीं&comma; बल्कि टिकाऊ विकास&comma; रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी हुई है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डॉ&period; मलिकराम के अनुसार आज का युवा मतदाता सिर्फ वादों से संतुष्ट नहीं होता&period; वह रोजगार&comma; तकनीक&comma; शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की ठोस नीति चाहता है&period; जब जलवायु परिवर्तन को ग्रीन जॉब्स&comma; स्टार्टअप और नई अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाता है&comma; तो यह युवाओं के लिए अवसर बनता है&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत के लिए क्लाइमेट चेंज कोई सैद्धांतिक बहस नहीं&comma; बल्कि रोजमर्रा की सच्चाई है&period; सूखा&comma; बाढ़&comma; फसल नुकसान और जल संकट सीधे किसानों की आय को प्रभावित कर रहे हैं&period; ग्रीन राजनीति सोलर पंप&comma; जल संरक्षण&comma; बायोगैस और स्थानीय रोजगार जैसे व्यावहारिक समाधान सामने रखती है। डॉ&period; अतुल मलिकराम ने कहा कि भविष्य में वही राजनीतिक दल मजबूत होंगे&comma; जो पर्यावरण&comma; अर्थव्यवस्था और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बना पाएंगे&period; ग्रीन राजनीति केवल चुनाव जीतने की रणनीति नहीं&comma; बल्कि देश को सुरक्षित और स्थायी विकास की ओर ले जाने का रास्ता है।<&sol;p>&NewLine;

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