ब्रह्माकुमारी की ओर से नशा मुक्त भारत का दिलाया गया संकल्प

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">फुलवारी शरीफ&comma; अजीत।<&sol;mark><&sol;strong> प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ने भारत सरकार सामाजिक न्याय विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया&period; इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया&comma; जिन्हें नशे से दूर रहने का संदेश देने के साथ&comma;किसी तरह का नशा नहीं करने की शपथ दिलाई गई&period;<br>कार्यक्रम का उद्घाटन पंचदीप प्रज्ज्वलित कर माउंट आबू से आई राजयोगिनी बीके रूक्मणि दीदी&comma;पटना की संगीता दीदी&comma;सेवा केंद्र&comma; एम्स रोड&comma;फुलवारी शरीफ&comma; पटना की इंचार्ज मीरा बहन&comma; डॉ सुशील कुमार सिंह&comma; वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मधुकर&comma; संचालिका उर्मिला बहन&comma; व्यवस्थापक वशिष्ठ भाई एवं राजेंद्र भाई ने संयुक्त रूप से किया&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राजयोगिनी बीके रूक्मिणी दीदी&comma;बीके संगीता दीदी&comma;बीके मीरा बहन ने इस मौके पर बताया कि प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से आध्यात्मिक सशक्तिकरण और आपसी परामर्श द्वारा नशा मुक्ति के लिए मन के खालीपन को दूर कर मानव समाज को सशक्त बनाया जा रहा है&period;उपस्थित लोगों को नशा नहीं करने के साथ साथ समाज को नशा मुक्त अभियान में महत्वपूर्ण सहयोग कर देश को नशा मुक्त कराने के अभियान में लगातार काम करने के लिए प्रेरित किया&period;पिछले कुछ सालों में भारत के साथ ही पूरे विश्व में नशा करने वाले और उससे पीड़ित लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है&period; इनके गंभीर परिणामों को देखते हुए नशे से होने वाले नुकसानों के प्रति जागरुक करने के लिए ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय राजयोग के माध्यम से कार्यरत है&period;दीदी ने कहा कि राज योग जीवन पद्धति से समाज नशा मुक्त हो सकता है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>दरअसल&comma;नशे से होने वाले नुकसानों के प्रति जागरुक करने के लिए कई संस्थाएं भी समाज में कार्यरत हैं&period; लोगों पर नशे की बढ़ती गिरफ्त और इसके दुष्परिणामों को देखते हुए भारत में भी राष्ट्रीय स्तर पर लोगों को जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं&period; कईं कानून भी बनाए गए हैं&comma; इसके बावजूद भी इस पर अमल नहीं हो पाता&period;भारत में बच्चों से लेकर बड़ों तक हर उम्र के लोगों को इसने अपना शिकार बनाया हुआ है&period; भारत में वैसे तो शराब&comma; सिगरेट&comma; तंबाकू का सेवन आजकल बहुत आम हो गया है&comma; लेकिन इसके अलावा भी लोग अलग अलग तरह के नशे करते हैं<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिनमे शराब&comma; अफीम&comma; चरस&comma; गांजा &lpar;भांग&rpar;&comma; हेरोइन व कोकेन जैसे घातक नशीले पदार्थ शामिल हैं&period; कुछ लोग तो दवाइयों का इस्तेमाल भी नशे के रूप में करते हैं&period; लोग खांसी के सिरप और कुछ निद्रकारक गोलियों का इस्तेमाल नशे के रूप में करते हैं&period; इसके अलावा भी लोगो ने नशा करने के अलग अलग तरीके खोज रखे हैं जैसे कोई पेट्रोल सूंघकर नशा करता है&comma; कोई थिनर सूंघ कर तो कोई सिलोचन से नशा करता है&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>उल्लेखनीय है कि शहर में आजकल आठ से बारह साल के बच्चों में व्हाइटनर&comma; सिलोचन और आयोडेक्स के नशा का प्रचलन हो गया है&period; इस नशे के लिए यह बच्चे कुछ भी करने को तैयार हैं&period; जिस उम्र में इन बच्चों के हाथों में कॉपी और किताब होनी चाहिए&comma; उस उम्र में इनके हाथों में व्हाइटनर&comma; सिलोचन और आयोडेक्स की शीशी नजर आती है&period; रेलवे स्टेशन और फुटपाथ पर रहने वाले बच्चे भी इसकी चपेट में आ चुके हैं जो इन्हे अपराध की ओर ढकेल रहा है&period;<code> <&sol;code><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><code>डॉ सुशील कुमार सिंह&comma; डॉ&period; वीना&comma; डॉ मीनाक्षी&comma;यूथ हॉस्टल्स एसोसियेशन ऑफ इंडिया&comma;बिहार प्रदेश के उपाध्यक्ष व वरिष्ठ पत्रकार सुधीर मधुकर ने भी अपने विचार व्यक्त किए&period;<&sol;code><&sol;p>&NewLine;

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