एम्स पटना में हुआ बिहार का पहला सफल लीवर प्रत्यारोपण, चिकित्सा इतिहास में जुड़ा नया अध्याय

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> एम्स पटना ने राज्य के चिकित्सा इतिहास में नया अध्याय जोड़ते हुए पहली बार लीवर प्रत्यारोपण सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया है&period; यह उपलब्धि न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है&period;एम्स पटना ने मंगलवार वार को इस जटिल शल्य चिकित्सा की सफलता की जानकारी प्रेस कांफ्रेंस के जरिए दी&period; इस सर्जरी में पटना के रहने वाले 40 वर्षीय युवक को नया जीवन मिला है&comma; जिसका लीवर मोटापे और गंभीर बीमारी के कारण पूरी तरह नष्ट हो गया था&period; युवक का वजन लगभग 122 किलोग्राम था और पेट में लगातार पानी भरता था&period; दिल्ली से पहुँची विशेषज्ञ टीम और एम्स पटना के चिकित्सकों ने मिलकर यह प्रत्यारोपण किया&period; इस प्रत्यारोपण में समस्तीपुर की त्रैता देवी ने मृत्यु के बाद लीवर&comma; कॉर्निया और गुर्दा दान कर किसी और को जीवनदान देने की प्रेरणादायक मिसाल पेश की।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<figure class&equals;"wp-block-image size-large"><img src&equals;"&sol;&sol;&sol;data&sol;user&sol;0&sol;org&period;wordpress&period;android&sol;cache&sol;img-20251014-wa00613826290648908232582&period;jpg" alt&equals;"" class&equals;"wp-image-8769" &sol;><&sol;figure>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह प्रत्यारोपण सर्जरी एम्स पटना के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग द्वारा की गई&comma; जिसमें डॉ&period; उत्पल आनंद&comma; डॉ&period; कुणाल परासर&comma; डॉ&period; बसंत नारायण सिंह और डॉ&period; किसलय कांत की टीम ने नई दिल्ली के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ&period; सुभाष गुप्ता के नेतृत्व वाली विशेषज्ञ टीम के साथ मिलकर कार्य किया&period; इस ऐतिहासिक सर्जरी की निगरानी कार्यकारी निदेशक डॉ&period; राजू अग्रवाल&comma; चिकित्सीय अधीक्षक डॉ&period; अनुप कुमार और डॉ&period; उत्पल आनंद ने की।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया विभाग के डॉ&period; उमेश भदानी&comma; डॉ&period; रजनीश कुमार&comma; डॉ&period; कुनाल सिंह&comma; डॉ&period; अभ्युदय कुमार और डॉ&period; नीरज कुमार ने मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित की&period; मेडिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के डॉ&period; रमेश कुमार और डॉ&period; सुधीर कुमार ने ऑपरेशन से पहले और बाद में मरीज की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली&period; रेडियोलॉजी विभाग से डॉ&period; राजीव प्रियदर्शी ने इमेजिंग सहायता दी&comma; जबकि ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ&period; अनिल कुमार ने अंगदान की समन्वय व्यवस्था संभाली&period; पैथोलॉजी विभाग की डॉ&period; पुणम भदानी&comma; डॉ&period; तरुण कुमार और डॉ&period; सुरभि ने भी इस सफलता में अहम भूमिका निभाई।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर &lpar;सेवानिवृत्त&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल ने इसे एम्स पटना की ऐतिहासिक सफलता बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि संस्थान की अत्याधुनिक चिकित्सा सेवा प्रदान करने और अंगदान के महत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक मील का पत्थर है&period; उन्होंने कहा कि एम्स पटना लगातार अपनी सर्जिकल क्षमताओं और स्वास्थ्य अवसंरचना को सशक्त बना रहा है ताकि बिहार और पूर्वी भारत के मरीजों को विश्वस्तरीय सुविधा मिल सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ&period; उत्पल आनंद ने इस उपलब्धि को टीम भावना का परिणाम बताते हुए कहा कि यह सफलता बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र की दिशा बदलने वाली है&period; उन्होंने कहा कि यह सर्जरी न केवल चिकित्सीय क्षमता का उदाहरण है बल्कि अंगदान करने वाले परिवार के निस्वार्थ योगदान का भी प्रतीक है&period; उन्होंने बताया कि बिहार में पहली बार हुई इस सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और अब प्रदेश के लोगों को ऐसे उपचार के लिए अन्य राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बताया गया की पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ&period; जी&period;के&period; पाल और डॉ&period; सौरभ वार्ष्णेय ने लीवर प्रत्यारोपण कार्यक्रम की रूपरेखा और तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई&period; वहीं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के डॉ&period; बंकिम&comma; प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ&comma; ऑपरेशन थिएटर टीम&comma; क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ और रेजिडेंट डॉक्टरों ने दिन-रात काम कर यह सफलता सुनिश्चित की।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एम्स प्रशासन का कहना है कि यह उपलब्धि बिहार में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की दिशा में ऐतिहासिक कदम है&period; अब बिहार के मरीजों को इस तरह की जटिल सर्जरी के लिए दिल्ली&comma; मुंबई या चेन्नई जाने की आवश्यकता नहीं होगी&period; एम्स पटना आने वाले समय में हृदय&comma; फेफड़े और गुर्दे प्रत्यारोपण की दिशा में भी कार्य प्रारंभ करेगा&period; इस सफलता ने न केवल बिहार को चिकित्सा क्षेत्र में नई पहचान दी है बल्कि यह संदेश भी दिया है कि अब राज्य में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हैं।<&sol;p>&NewLine;

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