पशुपालन के विकास में सरकार का थिंक टैंक बनेगा बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय : मंत्री नंदकिशोर राम

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजित।<&sol;strong> बिहार सरकार के डेयरी&comma; मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंद किशोर राम ने मंगलवार को बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय का दौरा किया&period; इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य में पशुपालन&comma; डेयरी और मत्स्य क्षेत्र के विकास को लेकर विस्तार से चर्चा की&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विश्वविद्यालय पहुंचने पर कुलपति डॉ&period; इन्द्रजीत सिंह ने मंत्री का पौधा भेंट कर स्वागत किया&period; बैठक में कुलपति ने विश्वविद्यालय की स्थापना से अब तक की उपलब्धियों&comma; शोध कार्यों&comma; आधुनिक तकनीक आधारित पढ़ाई&comma; पशु स्वास्थ्य जांच शिविर&comma; टीकाकरण अभियान और पशुपालकों के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कुलपति ने विश्वविद्यालय द्वारा विकसित बटेर लिट्टी&comma; चिकेन लिट्टी और व्हे सूप जैसे उत्पादों के बारे में भी मंत्री को बताया&period; इस पर मंत्री ने खुशी जताई&period; कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय राज्य सरकार के लिए &OpenCurlyDoubleQuote;थिंक टैंक” के रूप में कार्य करने को तैयार है और पशुपालन को आधुनिक बनाने तथा पशुपालकों की आय बढ़ाने में हरसंभव सहयोग देगा। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र की तर्ज पर पशु विज्ञान केंद्र स्थापित करने की जरूरत बताई&comma; ताकि पशुपालन से जुड़ी योजनाओं को गांव स्तर तक पहुंचाया जा सके&period; कुलपति ने कहा कि बिहार की लगभग 40 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पशुपालन पर निर्भर है&period; उन्होंने भैंस पालन&comma; बकरी पालन और हरे चारे की बड़ी संभावनाओं की भी जानकारी दी&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>मंत्री नंदकिशोर राम ने कहा कि बिहार का गौरवशाली इतिहास रहा है और इसे फिर से स्थापित करने के लिए सभी को समर्पण के साथ काम करना होगा&period; उन्होंने वैज्ञानिकों को &OpenCurlyDoubleQuote;बिहार का भाग्य निर्माता” बताते हुए कहा कि उनके योगदान से बिहार पशुपालन के क्षेत्र में देश में अग्रणी राज्य बन सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मंत्री ने कहा कि पशुपालन क्षेत्र में लगातार प्रगति हो रही है&comma; लेकिन विभिन्न योजनाओं और संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है&period; उन्होंने गौवंश के साथ भैंस पालन को बढ़ावा देने और रोजगार आधारित योजनाएं शुरू करने का आश्वासन दिया&period; साथ ही मुर्रा नस्ल की भैंसों के संवर्धन के लिए कार्य योजना बनाने और राज्य में दो नए पशु विज्ञान महाविद्यालय खोलने की संभावना भी जताई। इस दौरान मंत्री ने विश्वविद्यालय के पशु प्रक्षेत्र परिसर का निरीक्षण किया और पशुओं के रख-रखाव तथा देशी नस्लों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। बैठक में निदेशक पशुपालन उज्ज्वल कुमार&comma; निदेशक स्नातकोत्तर शिक्षा डॉ&period; पंकज कुमार सिंह&comma; निदेशक शोध डॉ&period; नरेश कुमार सिंह&comma; निदेशक प्रसार डॉ&period; निर्मल सिंह दहिया&comma; बिहार वेटरनरी कॉलेज के डीन डॉ&period; पल्लव शेखर&comma; संजय गांधी गव्य प्रौद्योगिकी संस्थान के डीन डॉ&period; ए&period;के&period; ठाकुर&comma; कुलसचिव कर्नल कामेश कुमार&comma; वित्त नियंत्रक संजय कुमार पाठक&comma; विधि पदाधिकारी अमित कुमार सहित कई अधिकारी और विभागाध्यक्ष मौजूद थे।<&sol;p>&NewLine;

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