जागरूक होकर करें कैंसर के लक्षणों की पहचान, संदेश होने पर नजदीकी अस्पताल में कराएं जांच

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पूर्णिया&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> कैंसर एक ऐसी जटिल एवं गंभीर बीमारी है&comma; जिससे ग्रसित होने पर पूरे विश्व में हर वर्ष लाखों लोग काल के गाल में समा जाते हैं। ज्यादातर मरीजों में जांच के दौरान पाया जाता है कि उनका कैंसर अब आखरी चरण में पहुंच चुका और वैसी स्थिति में उपचार संभव नहीं होता है। कैंसर ग्रसित होने पर शुरुआती लक्षणों को पहचानने के उपरांत ही उपचार संभव हो सकता है। लक्षण नजर आते ही कैंसर की जांच करवाने से कई जिंदगी बचायी जा सकती है। कैंसर सामान्यतः खतरनाक माना जाता लेकिन ससमय लक्षणों की पहचान कर इससे मुक्ति संभव है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सामान्यतः स्क्रीनिंग द्वारा पहचान में नजर आते हैं पांच प्रकार के कैंसर &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>सामान्य रूप से 05 प्रकार के कैंसर के सामान्यतः नजर आते हैं-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्सिनोमा &colon; यह मुख्यतः शरीर के फेफड़ों&comma; स्तन&comma; पैंक्रियाज एवं चमड़ी को प्रभावित करता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सारकोमा- यह सबसे ज्यादा शरीर की हड्डियों&comma; रक्त धमनियों&comma; वसा एवं मांसपेशी को प्रभावित करता है ।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मेलानोमा- यह शरीर की सेल को प्रभावित करता है। चमड़ी के कैंसर का यह प्रमुख कारण माना जाता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>लिम्फोमा- यह शरीर की सफ़ेद रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>ल्यूकेमिया- यह मानव शरीर के रक्त को प्रभावित करता है। ब्लड कैंसर इसी का स्वरूप है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>लक्षण के अनुसार 04 स्टेज में विभाजित किया जाता है कैंसर &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिला गैर संचारी रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सुभाष कुमार सिंह ने बताया कि ज्यादातर कैंसर के चार लक्षण पाए जाते हैं। इन्हें स्टेज 1 से लेकर स्टेज 4 तक की श्रेणी में रखा जाता है। स्टेज 1 की स्थिति में कैंसर का संक्रमण एक छोटे क्षेत्र में सीमित रहता और इसका फैलाव शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं होता है। स्टेज 2 में कैंसर में वृद्धि देखी जाती लेकिन फैलाव नहीं होता है। स्टेज 3 की स्थिति में कैंसर और फैल जाता है और शरीर की अन्य कोशिकाओं को प्रभावित करता है। स्टेज 4 जिसे एडवांस्ड कैंसर की स्थिति भी कहते हैं&comma; इसमें कैंसर तेजी से शरीर के कई अंगों में फैलता और कोशिकाओं को नष्ट करता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>कैंसर के लक्षण &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<ul class&equals;"wp-block-list">&NewLine;<li>मुंह के अंदर या बाहर फोड़ा&sol;जख्म का नहीं भरना।<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>मुंह के अंदर या जीभ पर सफेद चकता&comma; बलगम&comma; पखाना&comma; पेशाब या जननान्ग मार्ग से खून आना।<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>स्तन में गांठ&comma; स्तन से खून का रिसाव&comma; रजोवृति के बाद रक्तस्राव।<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>जननान्ग मार्ग रिसाव में दुर्गंध<&sol;li>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<li>चमड़े पर तिल या गांठ के आकार में इजाफा।<&sol;li>&NewLine;<&sol;ul>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>कैंसर के कारण &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>डॉ सिंह ने बताया कि व्यक्ति में कैंसर आनुवांशिक&comma; खराब एवं अनियंत्रित दिनचर्या&comma; शराब एवं तंबाकू का सेवन&comma; शरीर पर रेडिएशन का प्रभाव&comma; अंग प्रत्यारोपण आदि से हो सकता है। व्यसनों से दूरी&comma; नियंत्रित दिनचर्या एवं सजगता &comma;कैंसर से बचने का सबसे सरल एवं सुगम तरीका है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>शुरुआत में लक्षणों की पहचान जरूरी है &colon; सिविल सर्जन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने बताया कि कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान होने पर मरीज का इलाज संभव है जिससे ग्रसित मरीज को ठीक किया जा सकता है। वहीं&comma; ओरल व ब्रेस्ट कैंसर की प्रारंभिक पहचान मरीज स्वयं कर सकते हैं। इसके लिए लक्षणों की पहचान जरूरी है। ऐसे लोगों जो तंबाकू का सेवन अधिक करते हैं उन्हें कैंसर के खतरों व उसके पहचान से संबंधित जानकारी होनी चाहिए। स्वयं जांच करने के लिए मरीज को अपने मुंह को साफ पानी से धोते हुए कुल्ला करना होगा। उसके बाद आइने के सामने अच्छी रोशनी में सफेद या लाल छाले&comma; न ठीक होने वाले पुराने जख्म या घाव के साथ पूरा मुंह न खोल पाने जैसी बातों की जांच करनी है। यह परीक्षण महीने में एक बार अनिवार्य है। इससे कैंसर के लक्षणों की पहचान होगी। अगर उनमें मुंह के कैंसर के प्रारंभिक लक्षण दिखे&comma; तो तुरंत उन्हें चिकित्सक की सलाह लेना चाहिए ताकि समय पर ग्रसित मरीजों की पहचान करते हुए उन्हें सुरक्षित किया जा सके।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>कैंसर ग्रसित मरीजों के लिए जिले में उपलब्ध है किमियोथेरेपी सुविधा &colon;<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार कनौजिया ने कहा कि कैंसर ग्रसित मरीजों की पहचान होने पर ग्रसित मरीजों के उपचार के लिए जिले के राजकीय चिकित्सकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल में डे केयर सेंटर सुविधा उपलब्ध है जहां कैंसर ग्रसित मरीजों की किमियोथेरेपी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इसके साथ साथ ग्रसित मरीजों को सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक दवाई निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। लक्षण दिखाई देने पर लोगों को उसकी जांच करवाते हुए ग्रसित पाए जाने पर आवश्यक उपचार करवाना चाहिए ताकि संबंधित व्यक्ति कैंसर से सुरक्षित हो सकें।<&sol;p>&NewLine;

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