टीबी उन्मूलन अभियान की सफलता में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं आशा कमला देवी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">अररिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon;<&sol;mark><&sol;strong> टीबी की बीमारी अब लाइलाज नहीं है। बीमारी समय पर पकड़ आ जाये। तो इसका पूर्ण इलाज संभव है। इसलिये रोग का लक्षण दिखने पर बिना किसी संकोच के जांच व इलाज जरूरी है। वर्ष 2025 तक देश को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाने का महत्वकांक्षी लक्ष्य निर्धारित है। इसे निर्धारित मुकाम तक पहुंचाने में जिले की कुछ आशा बहनें अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। जिले के वरीय स्वास्थ्य अधिकारी भी उनके प्रयासों के मुरीद हैं। अररिया प्रखंड अंतर्गत पैकटोला निवासी आशा फैसिलिटेटर कमला देवी भी एक ऐसा ही नाम है। जो इस गंभीर संक्रामक बीमारी को जड़ से खत्म करने की मुहिम में सिद्दत से जुटी हैं। और इसलिये टीबी को मात दे चुके मरीज ही नहीं जिला यक्ष्मा विभाग के हर एक कर्मी की नजर में उनका एक अलग सम्मान है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>टीबी से जुड़े हादसों को देख मिली लोगों को इससे बचाने की प्रेरणा<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आशा फैसिलिटेटर कमला देवी के प्रयास से वर्ष 2007 से अब तक अररिया प्रखंड के पैकटोला व गैंडा पंचायत के 150 से अधिक मरीज टीबी से पूर्णत&colon; निजात पा चुके हैं&period; कमला बताती हैं कि बचपन से अपने आस-पास उन्होंने कई ऐसे लोगों को देखा जिन्हें शुरू में खांसी की शिकायत थी। धीरे-धीरे वे बेहद कमजोर व बीमार होते गये। और फिर अचानक उनका निधन हो जाता था। परिवार के बड़े बुजुर्ग अक्सर ऐसे लोगों से हमें दूर रहने की नसीहत देते थे। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आशा कार्यकर्ता के रूप में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ने बाद विभिन्न स्तरों पर आयोजित बैठक व प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शरीक होने के बाद उन्हें पता चला कि लोगों की मौत टीबी नामक बीमारी से हो रही है। जो पहले तो लाइलाज था। लेकिन अब सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों में रोग की जांच व समुचित इलाज का इंतजाम उपलब्ध है। बावजूद इसके जानकारी के अभाव में लोग समय पर जांच व इलाज से वंचित होकर अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने ठाना कि जब समुदाय के लोगों को जरूरी चिकित्सा सेवा का लाभ उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ईश्वर ने उन्हें सौंपी है। फिर क्यों न इस बीमारी से लोगों के बचाव का प्रयास किया जाये।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रोग से निजात पाकर कई मरीज कर रहे सफल जीवनयापन<br &sol;>आशा फैसिलिटेटर कमला ने कहा कि गृह भ्रमण के दौरान उन्हें क्षेत्र में लोगों के घर-घर जाना होता है। इस क्रम में अगर लंबे समय से बुखार व खांसी से पीड़ित&comma; बलगम में खून आने से जुड़ी शिकायत वाले लोग उन्हें मिलते हैं। वे उन्हें जांच के लिये साथ में जिला यक्ष्मा केंद्र लाती हैं। जहां जांच में टीबी की पुष्टि होने पर उन्हें दवा उपलब्ध कराते हुए उन्हें नियमित दवा सेवन के लिये प्रेरित करती हैं। समय समय पर उनका फॉलोअप भी करती हैं। इससे क्षेत्र के कई मरीज टीबी से पूरी तरह निजात पाकर खुशी-खुशी अपना जीवनयापन कर रहे हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्वास्थ्य अधिकारी भी करते हैं कमला के प्रयासों की सराहना<br &sol;>जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ वाईपी सिंह ने कहा कि टीबी उन्मूलन के प्रयासों में कमला का योगदान सराहनीय है। उनकी सक्रियता से अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को भी प्रेरणा लेने की जरूरत है। जिला टीबी व एड्स समन्वयक दामोदर प्रसाद कहते हैं कि दो से तीन दिन के अंतराल पर कमला हर दिन यक्ष्मा केंद्र किसी नये मरीज की जांच या किसी की दवा के लिये आती हैं। उनके प्रयासों का हम सब मुरीद तो हैं ही साथ ही उन्हें हर तरह के सहयोग के प्रति भी तत्पर हैं। एसटीएलएस अविनाश राज भाष्कर बताते हैं कि कोई मरीज अगर दवा के लिये यक्ष्मा केंद्र आने में असमर्थ होता है तो कमला उनका ट्रीटमेंट आईडेंटी कार्ड लेकर खुद केंद्र आती हैं और दवा का उठाव कर मरीजों तक पहुंचाती हैं। टीबी मरीजों की सेवा के प्रति उनके प्रयासों का हम सब कायल हैं।<&sol;p>&NewLine;

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