कड़ाके की ठंड में बचाव को लेकर एम्स पटना में जन-जागरूकता कार्यक्रम, डॉक्टरों ने शीत लहर से सतर्क रहने की दी सलाह

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; अजित।<&sol;strong> उत्तर भारत में जारी कड़ाके की ठंड और शीत लहर ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है&period; गिरते तापमान का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है&period; इसी को देखते हुए शुक्रवार को एम्स पटना के जनरल मेडिसिन विभाग की ओर से ओपीडी कॉम्प्लेक्स में शीत लहर से बचाव और उसके प्रबंधन को लेकर एक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह कार्यक्रम केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र &lpar;एनसीडीसी&rpar; के निर्देशानुसार आयोजित किया गया&period; कार्यक्रम का आयोजन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल के नेतृत्व में संपन्न हुआ&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम की शुरुआत जनरल मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष एवं रजिस्ट्रार प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; ज्योति प्रकाश के स्वागत भाषण से हुई&period; उन्होंने शीत लहर के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अत्यधिक ठंड से हाइपोथर्मिया&comma; हृदयाघात और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है&period; कार्यकारी निदेशक प्रो&period; डॉ&period; राजू अग्रवाल ने मरीजों और उनके परिजनों को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों को आम लोगों तक व्यापक रूप से पहुंचाना जरूरी है&period; उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से सीधा संवाद कर शीत लहर के दौरान सतर्कता बरतने की अपील की।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में बाल रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; चंद्र मोहन कुमार ने बच्चों में शीत लहर से होने वाली बीमारियों और उनके बचाव के उपायों पर जानकारी दी&period; वहीं न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ&period; आनंद कुमार राय ने ठंड के मौसम में स्ट्रोक के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई&period; कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; अमित राज ने भी आम जनता को ठंड से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां अपनाने की सलाह दी&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इसके अलावा जनरल मेडिसिन विभाग के संकाय सदस्य डॉ&period; अंजनी कुमार&comma; डॉ&period; नरेंद्र कुमार और डॉ&period; संजीव कुमार ने भी शीत लहर से संबंधित अपने विचार साझा किए&period; कार्यक्रम में रेजिडेंट चिकित्सकों&comma; नर्सिंग अधिकारियों और पैरामेडिकल स्टाफ की सक्रिय भागीदारी रही। जन-जागरूकता के उद्देश्य से &OpenCurlyDoubleQuote;शीत लहर के दौरान क्या करें और क्या न करें” विषय पर लगभग 100 पंपलेट मरीजों और उनके परिजनों के बीच वितरित किए गए&period; एम्स प्रशासन ने उम्मीद जताई कि इस तरह के कार्यक्रमों से लोग शीत लहर के खतरे को समझेंगे और अपनी सेहत की बेहतर देखभाल कर सकेंगे।<&sol;p>&NewLine;

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