एम्स पटना की चिकित्सक ने रचा इतिहास, वियना में भारत का बढ़ाया मान

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; अजित<&sol;strong>। जब सपनों में जुनून&comma; मेहनत में निरंतरता और लक्ष्य वैश्विक हो तो सफलता सीमाओं में नहीं बंधती है। इसी को साकार करते हुए एम्स पटना की चिकित्सक डॉ&period; स्वेतालिना प्रधान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया है। उन्होंने प्रतिष्ठित यूरोपीय त्वचा एवं यौन रोग अकादमी छात्रवृत्ति 2026 हासिल कर ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। यह सम्मान विश्वभर के चुनिंदा और उत्कृष्ट त्वचा रोग विशेषज्ञों को ही दिया जाता है। डॉ&period; प्रधान को भारत से एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में चुना गया है। उन्होंने कठोर और बहु-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय चयन प्रक्रिया में शीर्ष स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि उनके शोध&comma; समर्पण और वैश्विक प्रभाव का प्रमाण मानी जा रही है। इस उपलब्धि के साथ डॉ&period; प्रधान को यूरोपीय त्वचा एवं यौन रोग अकादमी सम्मेलन 2026 में भाग लेने का अवसर मिलेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>यह सम्मेलन ऐतिहासिक शहर वियना में 30 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। यह वही मंच है जहां दुनिया भर के शीर्ष विशेषज्ञ चिकित्सा के भविष्य की दिशा तय करते हैं। अब इस मंच पर भारत की आवाज के रूप में डॉ&period; प्रधान अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी। इम्रिच सरकानी गैर-यूरोपीय स्मृति छात्रवृत्ति के अंतर्गत केवल 30 गैर-यूरोपीय प्रतिभागियों का चयन होता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>हर देश से केवल एक प्रतिनिधि को ही यह अवसर मिलता है। चयन के लिए शोध की गुणवत्ता&comma; अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन&comma; शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों को आधार बनाया जाता है। इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए डॉ&period; प्रधान ने भारत में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर शीर्ष स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि के तहत उन्हें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पूर्ण प्रायोजित भागीदारी&comma; 1000 यूरो की आर्थिक सहायता और वर्ष 2027 के लिए सदस्यता प्रदान की जाएगी। साथ ही ऑस्ट्रिया केंद्र वियना में एक भव्य समारोह में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। डॉ&period; प्रधान की यह सफलता न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि एम्स पटना की शैक्षणिक उत्कृष्टता और भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का भी प्रतीक है। यह नई पीढ़ी की उस सोच को दर्शाता है जो सीमाओं से आगे बढ़कर संभावनाओं को पहचानती है और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाती है।<&sol;p>&NewLine;

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