एनएमसीएच में ‘गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस’ पर कार्यशाला : शोध में नैतिकता और रोगी सुरक्षा पर जोर

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमिटी के तत्वावधान में बुधवार को कॉलेज ऑडिटोरियम में &&num;8216&semi;गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस &lpar;GCP&rpar;&&num;8217&semi; पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में एनएमसीएच और पटना डेंटल कॉलेज के लगभग 60 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों &lpar;पीजी&rpar;&comma; संकाय सदस्यों और वरिष्ठ चिकित्सा शिक्षकों ने हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य भावी चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को यह समझाना था कि गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं है&comma; बल्कि यह प्रतिभागी के अधिकारों&comma; सुरक्षा&comma; पारदर्शी दस्तावेजीकरण और गरिमा की रक्षा पर पूरी तरह निर्भर करता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>मरीज की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एनएमसीएच की प्राचार्य प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; ऊषा कुमारी ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में अनुसंधान की गुणवत्ता तभी सार्थक है जब वह वैज्ञानिक होने के साथ-साथ नैतिक भी हो। उन्होंने कहा&comma; &&num;8220&semi;हर शोध के केंद्र में व्यक्ति की गरिमा और सुरक्षा होनी चाहिए&&num;8221&semi;। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्नातकोत्तर विद्यार्थी भविष्य के चिकित्सक और नीति-निर्माता हैं&comma; इसलिए उन्हें शोध में प्रतिभागी की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोपरि रखने का संस्कार शुरू से ही मिलना चाहिए।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>शोध को विश्वसनीय बनाता है GCP-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>IEC के मेंबर सेक्रेटरी प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; अजय कुमार सिन्हा ने बताया कि GCP केवल नियमों का संग्रह नहीं है&comma; बल्कि मानव प्रतिभागियों पर किए जाने वाले शोध के लिए नैतिकता और वैज्ञानिक गुणवत्ता का साझा मानक है। उन्होंने कहा कि इसका पालन शोधकर्ता&comma; संस्थान और समाज के बीच विश्वास को मजबूत करता है। &ZeroWidthSpace;वहीं&comma; कार्यक्रम के समन्वयक डॉ&period; विकास शंकर ने पीजी थीसिस &lpar;PG Thesis&rpar; को जिम्मेदार वैज्ञानिक बनने की पहली प्रयोगशाला बताया। उन्होंने कहा कि एक अच्छे शोध की तीन मूल प्रतिज्ञाएं हैं—प्रतिभागी की सुरक्षा&comma; विश्वसनीय डेटा और सार्वजनिक विश्वास। इनमें से किसी एक से भी समझौता होने पर शोध की नैतिक और वैज्ञानिक उपयोगिता प्रभावित होती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>विशेषज्ञों ने दिए व्यावहारिक टिप्स-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>&ZeroWidthSpace;प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; आरती कुमारी ने GCP के मूल सिद्धांतों और प्रतिभागियों के अधिकारों पर चर्चा की। &ZeroWidthSpace;प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; सुनील कुमार ने अनुसंधान में प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर &lpar;Principal Investigator&rpar; की जिम्मेदारियों को रेखांकित किया। &ZeroWidthSpace;प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; सतीश कुमार ने बताया कि &&num;8216&semi;इन्फॉर्मड कंसेंट&&num;8217&semi; &lpar;Informed Consent&rpar; केवल हस्ताक्षर लेना नहीं&comma; बल्कि स्वैच्छिक निर्णय और निरंतर संवाद की एक नैतिक प्रक्रिया है। &ZeroWidthSpace;प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; आशा सिंह ने सेफ्टी रिपोर्टिंग और प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; आर&period; आर&period; दास ने शोध के दौरान होने वाली क्षति और मेडिको-लीगल पहलुओं की अहम जानकारी दी। प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; संजय कुमार ने पारदर्शी दस्तावेजीकरण&comma; प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; मून ने मॉनिटरिंग व ऑडिट&comma; और प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; अखिलेश कुमार ने डेटा इंटिग्रिटी व रिसर्च मिसकंडक्ट से बचने के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। &ZeroWidthSpace;इस अवसर पर प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; पी&period; डी&period; वर्मा&comma; प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; इंदु कुमारी&comma; प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; तबस्सुम अहमद सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ शिक्षक मौजूद रहे। &ZeroWidthSpace;गौरतलब है कि एनएमसीएच की एथिक्स कमिटी&comma; स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त बिहार के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों की वर्तमान में एकमात्र समिति है। संस्थान का यह प्रयास राज्य में नैतिक और गुणवत्तापूर्ण शोध संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।<&sol;p>&NewLine;

Related posts

चौक थाना पुलिस की कार्रवाई, हत्या के प्रयास के आरोपी समेत 10 गिरफ्तार!

बाढ़ के पानी के बीच बिजली के तार की चपेट में आया युवक, मुकेश कुमार की मौत!

डॉ. वर्गीज कुरियन की पुण्यतिथि पर पटना डेयरी में श्रद्धांजलि