19 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है बलिया बलिदान दिवस

&NewLine;<p><strong>बलिया&lpar;सजंय कुमार तिवारी&rpar;&colon;<&sol;strong> 361 विधानसभा सपा प्रभारी लक्ष्मण गुप्ता ने बताया की 1942 में आज के ही दिन यूपी के बलिया आजाद हुआ था&comma; अंग्रेजी हुकुमत ने टेके थे घुटने &excl;जहाँ 19 अगस्त 1942 को 14 दिनों के लिए आजाद हुआ। आज़ादी के 81वी वर्षगाठ को मनाते हुए स्वतंत्रासेनानियो ने बलिया जिलाकारागार का दरवाजा खोलकर शेरे बलिया चित्तू पाण्डेय सहित शहीद पार्क में महात्मागांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।देश को आजादी 1947 में मिली पर बलिया जनपद के बागी तेवर ने 19 अगस्त 1942 को अंग्रेजो के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए 14 दिन आज़ाद रहा। 81 वर्ष पूर्व हुई इस घटना को दोहराते हुए बलिया जिला कारागार का गेट खोला गया और स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत माता की जय के नारे लगाते हुए शहर का भ्रमण किया ।भारत छोड़ो आंदोलन में बलिया के लोगो का जनाक्रोश देख तत्कालीन डीएम जे0 निगम ने बलिया जिला कारागार के गेट खोलकर सभी बंदी स्वतंत्रासेनानियों को रिहा कर दिया। शेरे बलिया चित्तू पांडेय बलिया के पहले डीएम बने और अंग्रेजी हुकूमत के समानांतर 14 दिनों तक सरकार चली। बलिदान दिवस के दिन स्वतंत्रासेनानियो &comma;साहित्यकारों के साथ ही प्रसाशनिक अधिकारियों ने भी शहर में सभी स्वतंत्रतासेनानियों की मूर्ती पर माल्यार्पण किया।निषिद श्रीवास्तव निशु ने बताया की बलिया बलिदान दिवस बलिया के स्वतंत्रासेनानियो की वीरगाथा और बलिदान को याद करने का दिन है । आज़ादी के दीवानों के बागी तेवर के सामने अंग्रेजी हुकूमत को घुटने टेकने पड़े। इस दौरान स्वतंत्रा सेनानी के पदाधिकारी गण&comma; नगर पालिका अध्यक्ष अजय कुमार&comma; नगर पालिका ईओ दिनेश शर्मा&comma; निषिद श्रीवास्तव निशू&comma;जाकिर हुसैन&comma; जैनेंद्र पांडे &comma;मनोज गुप्ता &comma;सागर सिंह राहुल&comma; सर्धमान व सैकड़ों लोग रहे मौजूद।<&sol;p>&NewLine;

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