यक्ष्मा केन्द्र ने केएचपीटी के सहयोग से सीएचओ के लिए किया प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong><mark style&equals;"color&colon;&num;cf2e2e" class&equals;"has-inline-color has-vivid-red-color">पूर्णिया&comma; न्यूज क्राइम 24।<&sol;mark><&sol;strong> भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 तक देश से यक्ष्मा उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसको लेकर राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय सह अस्पताल परिसर स्थित एकेडमिक भवन के सभागार में कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट &lpar;केएचपीटी&rpar; के सहयोग से यक्ष्मा केंद्र द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।<br>इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी&comma; जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ मिहिरकांत झा&comma; डीपीएम सोरेंद्र कुमार दास&comma; डैम पंकज मिश्रा&comma; डीपीसी डॉ सुधांशु शेखर&comma; डीपीएस राजेश कुमार&comma; केएचपीटी के जिला समन्वयक अरुणेंदु झा&comma; डब्ल्यूएचओ के डॉ &lpar;मेजर&rpar; अवकाश कुमार&comma; वर्ल्ड विजन इंडिया के डीसी अभय श्रीवास्तव&comma; जपाइओ के डॉ गंगेश गुंजन&comma; जीविका समूह से जुड़ी राम नगर की उर्मिला देवी और फिरोजा खातून&comma; कांझा कोठी की खुशबू कुमारी&comma; गोकुलपुर की सुमन देवी&comma; गणेश पुर की गुंजन देवी सहित कई अन्य अधिकारी और कर्मी उपस्थित थे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>टीबी मुक्त करने में सीएचओ की भूमिका काफ़ी महत्वपूर्ण&colon; सिविल सर्जन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी ने कहा कि देश को टीबी मुक्त करने में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका काफ़ी महत्वपूर्ण है। टीबी उन्मूलन अभियान में मरीजों को नियमित रूप से दवा सेवन सबसे अधिक मददगार साबित होता है। जिसमें सुदूर ग्रामीण इलाकों में ग्रामीण स्तर पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका काफ़ी महत्वपूर्ण मानी जाती है। किसी की भी मामूली रूप से तबियत खराब होने पर लोग सबसे पहले ग्रामीण चिकित्सकों के पास ही जाते हैं। जिस कारण किसी भी तरह की बीमारियों का पता या जानकारी सबसे पहले इन्हीं लोगों के पास होती है। इनलोगों के द्वारा ही मरीज को पीएचसी&comma; सीएचसी&comma; रेफ़रल या अनुमंडलीय अस्पताल के अलावा जिला मुख्यालय स्थित यक्ष्मा केंद्र भेजा जाता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>केएचपीटी द्वारा सामुदायिक स्तर पर ग्रामीणों को किया जाता है जागरूक&colon; डॉ मिहिरकांत झा<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ मिहिरकांत झा द्वारा  प्रशिक्षण कार्यशाला में उपस्थित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को टीबी बीमारी से संबंधित लक्षण&comma; निदान एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जाने वाली सेवाओं की जानकारी दी गई। उनके द्वारा सरकार द्वारा यक्ष्मा उन्मूलन को लेकर चलाए जा रहे अभियान के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। कहा कि यक्ष्मा उन्मूलन में केएचपीटी द्वारा सामुदायिक स्तर पर ग्रामीणों को जागरूक किया जाता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>ग्रामीण स्तर पर जीविका दीदियों के साथ मिलकर चलाया जाता है जागरूकता अभियान&colon; केएचपीटी<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट &lpar;केएचपीटी&rpar; के जिला समन्वयक अरुणेंदु झा ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी à¤—्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा की रीढ़ माने जाते हैं। इनके पास ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश रोगी पहुंचते हैं। इसीलिए सीएचओ से आग्रह किया गया कि उनके संज्ञान में आने के बाद टीबी के लक्षण वाले सभी रोगियों को निकटतम बलगम जांच केंद्र तक भेजने में सहयोग करें। सामुदायिक संरचना जैसे जीविका दीदी के साथ भी सभी ग्रामीण चिकित्सक समन्वय स्थापित कर संभावित रोगियों की पहचान कर उनकी जांच कराने में सहयोग करें। कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट के अधिकारियों द्वारा जिले के विभिन्न प्रखंडों में सामुदायिक स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं और जीविका समूह से जुड़ी दीदियों के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रम संचालित किया जाता है।<&sol;p>&NewLine;

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