टीबी मरीजों की स्थिति व जरूरत के अनुरूप उपलब्ध होगी उपचार सेवाएं

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर<&sol;strong> टीबी दुनिया भर के देशों के लिये स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौती बनी हुई है&period; हालांकि टीबी का इलाज संभव है&period; लेकिन इसके निदान व उपचार संबंधी चुनौतियां आज भी बरकरार है&period; लिहाजा स्वास्थ्य विभाग टीबी मरीजों के उपचार संबंधी एक नई पहल पर अमल कर रहा है&period; जो रोगियों को एक ही तरह की चिकित्सा सुविधा देने के बजाय उनकी स्थिति&comma; बीमारी की गंभीरता व व्यक्तिगत जरूरतों का ध्यान में मरीजों को अलग-अलग तरीके से देखभाल प्रदान करने पर आधारित है&period; इस विभेदित टीबी देखभाल सेवाओं को प्रभावी व उपयोगी बनाने को लेकर जिले में जरूरी कवायद की जा रही है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>टीबी मरीजों को अलग-अलग देखभाल होती है जरूरत<br &sol;>जिला यक्ष्मा रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ वाईपी सिंह ने बताया कि विभिन्न प्रकार के टीबी रोगियों को अलग-अलग देखभाल सेवाओं की जरूरत होती है&period; जैसे एमडीआर यानी मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के मरीजों को लंबी अवधि तक इलजा की जरूरत होती है&period; जो साधारण टीबी की तुलना में अधिक जटिल होता है&period; इसी तरह टीबी व एचआईवी संक्रमित मरीजों को अलग अलग उपचार व देखभाल की जरूरत होती है&period; गर्भवती महिलाएं&comma; बुजुर्ग व बच्चों जैसे संवेदनशील समूह के टीबी मरीजों को विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है&period; ताकि उनकी सुरक्षा व स्वास्थ्य को प्राथमिकता दिया जा सके&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>जरूरत के हिसाब से सेवा होगी उपलब्ध<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>जिला टीबी व एड्स समन्वयक दामोदर शर्मा ने बताया कि विभेदित टीबी देखभाल सेवा के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाल ही में कर्मियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है&period; इसमें मरीजों का अलग अलग समूह बनाकर जरूरी चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने&comma; अस्पताल आने से असमर्थ मरीजों को घर पर नियमित निगरानी व दवा सेवन सुनिश्चित कराने&comma; विभिन्न सामाजिक संगठनों की मदद से समुदाय को रोग के खतरों के प्रति जागरूक करने&comma; टेलीमेडिसिन व मोबाइल एप्स की मदद से मरीजों को उनकी दवाओं की निगरानी व समय पर जरूरी सुझाव दिये जाने की पहल शामिल है&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>रोग उन्मूलन के प्रयासें को मिलेगी मजबूती<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><br>सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप ने बताया कि विभेदित टीबी देखभाल सेवा का उद्देश्य यह सुनिश्चित कराना है कि मरीजों को उनके उपचार की प्रक्रिया में अधिक सहायता मिले व उन्हें बार-बार अस्पताल आने की मजबूरी से निजात मिल सके&period; इससे टीबी संबंधी मामलों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा&period; जो रोग उन्मूलन संबंधी प्रयासों की मजबूती के लिये जरूरी है&period;<&sol;p>&NewLine;

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