कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम को प्रभावी बनाने को प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

<p><strong>अररिया&lpar;रंजीत ठाकुर&rpar;&colon;<&sol;strong> कालाजार रोग की जांच व इलाज विषय पर एक दिवसीय समीक्षात्मक बैठक सह प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार को समाहरणालय स्थिति डीआरडीए सभागार में किया गया&vert; डब्ल्यूएचओ द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का उद्घाटन वीबीडीसीओ डॉ अजय कुमार सिंह&comma; डब्ल्यूएचओ के डॉ दिलीप कुमार&comma; वीबीडी कंस्लटेंट सुरेंद्र बाबु&comma; वीडीसीओ ललन कुमार सहित उपस्थित अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों ने सामूहिक रूप से किया&vert; समीक्षात्मक बैठक में सभी पीएचसी के एमओआईसी सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ सभी केटीएस व एटीएस मौजूद थे&vert; कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ एमपी गुप्ता&comma; एसीएमओ डॉ सीपी मंडल सहित अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों ने कालाजार उन्मूलन अभियान को प्रभावी बनाने के लिये जरूरी सुझाव दिये&period;<&sol;p>&NewLine;<h3><strong>शुरुआती अवस्था में रोगियों की खोज व संपूर्ण इलाज महत्वपूर्ण-<&sol;strong><&sol;h3>&NewLine;<p>समीक्षात्मक बैठक में कालाजार उन्मूलन के लिये किये जा रहे विभिन्न प्रयासों की गहन समीक्षा की गयी&vert; इसमें कालाजार मरीजों की खोज&comma; जिले में संचालित छिड़काव अभियान की अद्यतन स्थिति व चिह्नित गांवों के शत प्रतिशत घरों में छिड़काव का कार्य संपन्न कराने को लेकर विस्तृत चर्चा की गयी&vert; वीडीसीओ डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि जिले में कालाजार के मामले लगातार कम हो रहे हैं&vert; लेकिन वीएल व पीकेडीएल के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं&vert; कुछ नये इलाकों में कालाजार का मामला सामने आना विभाग के लिये चिंतनीय है&vert; उन्होंने कहा कि शुरुआती अवस्था में भी कालाजार रोगियों की खोज व उनका संपूर्ण इलाज महत्वपूर्ण है&period; वीडीसीओ ने कहा कि छिड़काव संबंधी कार्य में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी&vert; इस तरह के शिकायत आने पर छिड़काव दल में शामिल कर्मी ही नहीं केटीएस व एटीएस पर भी कार्रवाई संभव है&vert; छिड़काव कार्य को प्रभावी बनाने के लिये संबंधित बीडीओ व एमओआईसी को अभियान में शामिल करने पर जोर दिया गया&vert; साथ ही कालाजार रोगियों की खोज के लिये संबंधित क्षेत्र की आशा को प्रेरित व प्रोत्साहित करने की जरूरत पर बल उन्होंने दिया&period;<&sol;p>&NewLine;<h3><strong>नये इलाके में सामने आ रहे हैं कालाजार के मामले<&sol;strong>&&num;8211&semi;<&sol;h3>&NewLine;<p>डब्ल्यूएचओ के जेडसी एनटीडी डॉ दिलीप कुमार ने बताया कि वर्ष 2020 में जिले के विभिन्न प्रखंडों में कुल वीएल व पीकेडीएल के कुल 53 मामले सामने आये&vert; इसमें रानीगंज से 18 व फारबिसगंज में सबसे अधिक 23 मामले मिले&vert; फारबिसगंज के थरिया बखिया जिले का सबसे अधिक कालाजार प्रभावित क्षेत्र है&vert;&period; लेकिन परवाहा में मिले सात मरीजों में तीन छोटे बच्चों का शामिल होना चिंतानीय है&vert; उन्होंने कुछ नये इलाकों में कालाजार के मिलने पर चिंता जतायी&vert; साथ ही ऐसे गांवों को चिह्नित करते हुए यहां विशेष कैंपन के संचालन का अनुरोध स्वास्थ्य अधिकारियों से किया&period;<&sol;p>&NewLine;<h3><strong>जिले के 20 गांव हैं हॉटस्पॉट जोन में शामिल-<&sol;strong><&sol;h3>&NewLine;<p>डीपीओ केयर ने कहा कि कालाजार उन्मूलन के लिये किये जा रहे प्रयासों की मजबूती के लिये प्रखंड स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाना जरूरी है&vert; विभागीय आदेश का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पहले कालाजार दवाओं का छिड़काव छह फीट की ऊंचाई तक किया जाता था&vert; नये गाइडलाइन के मुताबिक इसे बढ़ा कर पूरी दिवाल यानि नौ से 10 फीट तक छिड़काव किया जाना है&vert; उन्होंने कहा कि जिले के सात प्रखंडों में फिलहाल छिड़काव का कार्य जारी है&vert; छिड़काव के लिये चिह्नित 26 गांवों में छिड़काव का कार्य पूर्ण हो चुका है&vert; उन्होंने कहा कि वैसे गांव जहां कालाजार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं&vert; उन्हें चिह्नित कर छिड़काव व विशेष कैंप के आयोजन की पहल की जा रही है&period; कालाजार मामलों को लेकर चिह्नित हॉटस्पॉट गांवों में अररिया प्रखंड के पांच&comma; भरगामा के एक&comma; फारबिसगंज के पांच&comma; कुर्साकांटा के दो&comma; रानीगंज के दस गांवों कुल 23 गांवों को शामिल किया गया है।<&sol;p>&NewLine;

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