खाद्य सुरक्षा और पोषण के लिए आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक ज्ञान जरूरी

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> बिहार राज्य उत्पादकता परिषद की ओर से शुक्रवार को बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन हॉल&comma; पटना में पटना मैनेजमेंट एसोसिएशन और बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सहयोग से राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गयी&period; संगोष्ठी में खाद्य सुरक्षा&comma; पोषण&comma; कृषि उत्पादकता&comma; खाद्य बर्बादी रोकने और जलवायु अनुकूल खेती पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्वागत भाषण में डी&period; के&period; श्रीवास्तव ने भारत में कुपोषण की चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि बीएसपीसी खाद्य उत्पादकता और पोषण में 30 प्रतिशत वृद्धि के लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध है&period; महासचिव एडवोकेट बसंत कुमार सिन्हा ने खाद्य बर्बादी कम करने के लिए नवाचार&comma; आधुनिक तकनीक और ग्रामीण तकनीक के उपयोग पर जोर दिया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आईएएस &lpar;सेवानिवृत्त&rpar; डॉ&period; ए&period; के&period; रथ ने कृषि और खाद्य नीति से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए स्थानीय फसलों को बढ़ावा देने&comma; भोजन की बर्बादी रोकने और बच्चों व माताओं को कुपोषण से बचाने पर जोर दिया&period; पूर्व एनपीसी निदेशक आर&period; डी&period; मिश्रा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता&comma; ड्रोन&comma; जलवायु-स्मार्ट कृषि और ग्रीनहाउस खेती जैसी तकनीकों के उपयोग की जरूरत बतायी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आईआईटी खड़गपुर के पूर्व प्रोफेसर प्रो&period; के&period; एन&period; तिवारी ने सतत खाद्य सुरक्षा&comma; जल उत्पादकता और जलवायु लचीली कृषि पर जोर देते हुए बिहार में छोटी प्रसंस्करण इकाइयों और आधुनिक कृषि मशीनरी के उपयोग की संभावनाएं बतायीं&period; डॉ&period; आशुतोष उपाध्याय ने कृषि में नवाचार&comma; बाजार असमानता और किसानों तक तकनीकी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाने की जरूरत बतायी।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>अनूप सिन्हा ने अनुबंध खेती के माध्यम से संपीड़ित जैव गैस की संभावनाओं पर प्रकाश डाला&period; नाबार्ड के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक सुनील कुमार ने कोल्ड चेन&comma; किसान उत्पादक संगठनों&comma; गर्मी सहने वाली फसलों&comma; दाल&comma; मक्का और मखाना जैसी फसलों में विविधीकरण तथा ग्रामीण पैकहाउस को बढ़ावा देने की बात कही।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समापन संबोधन में बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकरण के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आईएएस &lpar;सेवानिवृत्त&rpar; गिरीश शंकर ने समग्र पोषण सुरक्षा के लिए दूरदर्शी सोच अपनाने पर जोर दिया&period; उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने&comma; मोटे अनाज और जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने&comma; कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कीट निगरानी और कृषि क्लस्टर विकसित करने की जरूरत बतायी&period; धन्यवाद ज्ञापन डॉ&period; ए&period; के&period; वर्मा ने किया।<&sol;p>&NewLine;

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