दवाओं के दुष्प्रभावों की समय पर रिपोर्टिंग से मजबूत होगी मरीजों की सुरक्षा

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; अजीत।<&sol;strong> एम्स पटना के फार्माकोलॉजी विभाग स्थित एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सेंटर की ओर से मंगलवार को दवाओं के तर्कसंगत इस्तेमाल और मरीजों की सुरक्षा पर सतत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किया गया&period; भारत सरकार के भारतीय भेषज संहिता आयोग के तत्वावधान में 6वें राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह 2026 के तहत आयोजित कार्यक्रम का विषय &OpenCurlyQuote;फार्माकोविजिलेंस के माध्यम से दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देना&colon; सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक कदम’ था।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो&period; &lpar;ब्रिगेडियर&rpar; डॉ&period; राजू अग्रवाल ने कहा कि किसी भी दवा का इस्तेमाल उसकी जरूरत&comma; लाभ और संभावित जोखिम को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए&period; उन्होंने एंटीबायोटिक के अनावश्यक इस्तेमाल से बचने पर जोर दिया और कहा कि जरूरत नहीं होने पर एंटीबायोटिक नहीं लिखने का निर्णय भी चिकित्सकीय समझ और आत्मविश्वास की मांग करता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के फार्माकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; बिकाश मेधी ने दवाओं की लगातार निगरानी और उनके संभावित दुष्प्रभावों की समय पर पहचान को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>भारतीय भेषज संहिता आयोग के नेशनल कोऑर्डिनेशन सेंटर-फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ&period; आर&period; एस&period; रे ने दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की रिपोर्टिंग के महत्व पर प्रकाश डाला&period; उन्होंने कहा कि ऐसी रिपोर्टिंग से दवाओं से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान कर उनकी सुरक्षा बेहतर बनाने में मदद मिलती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल&comma; बिहटा के प्राचार्य एवं आईजीआईएमएस पटना के फार्माकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एमेरिटस प्रो&period; &lpar;डॉ&period;&rpar; हरिहर दीक्षित ने सोशल फार्माकोविजिलेंस की अवधारणा पर चर्चा की&period; उन्होंने कहा कि दवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल में मरीजों&comma; परिजनों और आम लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>विशेषज्ञों ने कहा कि दवा लेने के बाद किसी तरह का असामान्य प्रभाव या परेशानी होने पर इसकी जानकारी स्वास्थ्यकर्मी को देना जरूरी है&period; समय पर दुष्प्रभाव की जानकारी मिलने से संभावित नुकसान को रोकने और मरीजों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>सीएमई में चिकित्सकों&comma; स्वास्थ्यकर्मियों&comma; फैकल्टी सदस्यों&comma; रेजिडेंट्स और विद्यार्थियों ने दवाओं के सही इस्तेमाल&comma; दुष्प्रभावों की पहचान और उनकी रिपोर्टिंग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की&period; कार्यक्रम के अंत में फार्माकोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष तथा एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सेंटर के कोऑर्डिनेटर डॉ&period; प्रमोद कुमार मांझी ने अतिथियों&comma; विशेषज्ञों&comma; फैकल्टी सदस्यों&comma; रेजिडेंट्स&comma; विद्यार्थियों और कर्मचारियों के प्रति आभार जताया।<&sol;p>&NewLine;

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