इमारत ए शरिया के मजलिस-ए-शूरा अधिवेशन में तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>फुलवारीशरीफ&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar;<&sol;strong> इमारत ए शरिया बिहार&comma; ओडिशा&comma; झारखंड और पश्चिम बंगाल के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित मजलिस-ए-शूरा बैठक के अवसर पर तीन महत्वपूर्ण धार्मिक एवं बौद्धिक पुस्तकों का विमोचन किया गया&period; कार्यक्रम हज़रत अमीर-ए-शरीयत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी की सरपरस्ती में आयोजित हुआ।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>इस अवसर पर प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान एवं लेखक मौलाना मुफ्ती ऐन-उल-हक अमिनी कासमी की पुस्तक &OpenCurlyDoubleQuote;अफ़कार-ए-वली” का विमोचन किया गया&period; यह पुस्तक सातवें अमीर-ए-शरीयत मौलाना मुहम्मद वली रहमानी के विचार&comma; जीवन&comma; कार्यप्रणाली और सामाजिक-धार्मिक सेवाओं पर आधारित है। साथ ही मौलाना मुफ्ती ऐन-उल-हक अमिनी कासमी की दूसरी पुस्तक&OpenCurlyDoubleQuote;तज़किर-ए-मुशफिक-ए-मिल्लत” का भी विमोचन किया गया&period; यह पुस्तक मौलाना मुहम्मद शफीक आलम कासमी के जीवन&comma; विद्वतापूर्ण सेवाओं और सामाजिक योगदान पर केंद्रित है&period;<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कार्यक्रम में मुफ्ती महफूज़-उर-रहमान कासिमी के विचारों पर आधारित पुस्तक &OpenCurlyDoubleQuote;हय्या अली अल-फलाह” का भी लोकार्पण किया गया&comma; जिसका संपादन कारी मुहम्मद हैदर ने किया है&period;<br>मौके पर हज़रत अमीर-ए-शरीयत ने लेखकों और संपादकों को बधाई देते हुए कहा कि शोध और लेखन समाज के लिए मार्गदर्शक होते हैं और आने वाली पीढ़ियों को दिशा प्रदान करते हैं&period; कार्यक्रम में शूरा परिषद के सदस्य&comma; उलेमा&comma; बुद्धिजीवी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे और सभी ने इन पुस्तकों को महत्वपूर्ण बौद्धिक धरोहर बताया।<&sol;p>&NewLine;

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