यह लड़ाई आज के लिए नहीं, आने वाले सौ वर्षों के लिए है…

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; &lpar;न्यूज़ क्राइम 24&rpar; <&sol;strong>देशभर में जहां 80वां स्वतंत्रता दिवस उत्साह के साथ मनाया गया&comma; वहीं पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर बिहार के अतिथि शिक्षकों&comma; शोधार्थियों एवं सहायक प्राध्यापक अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन सह महाधरना 12वें दिन भी जारी रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आंदोलनकारियों ने धरना स्थल पर तिरंगा फहराया। पिछले 12 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे ऑल पीएच&period;डी&period; होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार के प्रदेश संयोजक कुमुद पटेल ने ध्वजारोहण किया। इस दौरान आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा&comma; &OpenCurlyDoubleQuote;यह लड़ाई आज के लिए नहीं&comma; आने वाले सौ वर्षों के लिए है।”<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कुमुद पटेल ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक भर्ती या विज्ञापन तक सीमित नहीं है&comma; बल्कि बिहार में उच्च शिक्षा की दिशा&comma; शोधार्थियों के सम्मान&comma; युवाओं के रोजगार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा संघर्ष है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से छह सूत्री मांगों पर ठोस एवं लिखित आश्वासन मिलने तक आमरण अनशन जारी रहेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>छह सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>4 अगस्त से चल रहे आंदोलन में शोधार्थियों एवं अभ्यर्थियों ने उच्च शिक्षा और सहायक प्राध्यापक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी विभिन्न मांगें उठाई हैं। इनमें UGC Regulation 2018 एवं Table 3A लागू करने&comma; PhD&sol;NET&sol;JRF जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताओं को उचित वेटेज देने&comma; सहायक प्राध्यापक नियुक्ति की अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करने&comma; रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्ति&comma; डोमिसाइल नीति लागू करने तथा विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्वायत्तता की रक्षा की मांग शामिल है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आंदोलनकारियों ने बिहार के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में लंबे समय से कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों के सेवा सामंजन और नियमित नियुक्ति होने तक सेवा-संरक्षण की भी मांग की। वहीं&comma; 1 जुलाई 2026 को जारी सहायक प्राध्यापक नियुक्ति संबंधी परिनियम में पीएच&period;डी&period; के लिए निर्धारित 11 अंकों के वेटेज पर भी आंदोलनकारियों ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि उच्च शोध योग्यताओं को नियुक्ति प्रक्रिया में पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आंदोलनकारियों ने कहा कि उच्च शिक्षा में पारदर्शी&comma; न्यायपूर्ण एवं गुणवत्तापूर्ण नियुक्ति व्यवस्था स्थापित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उनका दावा है कि शोध एवं उच्च शैक्षणिक योग्यताओं को उचित महत्व नहीं मिलने का असर बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>16 अगस्त को पप्पू यादव के समर्थन का दावा-<&sol;strong><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आंदोलनकारियों ने लोकतांत्रिक अधिकारों&comma; समान अवसर और न्यायपूर्ण नियुक्ति व्यवस्था के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार&comma; आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों तथा शिक्षाविदों का समर्थन मिल रहा है। सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के 16 अगस्त को गर्दनीबाग धरना स्थल पहुंचकर आंदोलन के समर्थन में उपवास रखने की बात भी कही गई है। धरना स्थल पर पीएच&period;डी&period; धारकों&comma; रिसर्च स्कॉलर्स&comma; विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं एवं पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्यों सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।<br><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>आंदोलनकारियों ने दोहराया कि सरकार की ओर से लिखित आश्वासन और मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आमरण अनशन एवं महाधरना जारी रहेगा।<&sol;p>&NewLine;

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