मछली के उत्पादन व्यापार पर ड्रोन की उपयोगिता से बढ़ेगा बाजार

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>पटना&comma; अजित यादव<&sol;strong> &colon; ड्रोन की तकनीक अब हर क्षेत्र में इस्तेमाल हो रहा है ऐसे में मत्स्य क्षेत्र में ड्रोन तकनीक से व्यापार के विस्तार में अपार सफलताएं और संभावनाओं बाजार भी बढ़ेगा&period; ड्रोन से मदद से मछुआरों मत्स्य कर्मियों को काफी फायदा होगा&period; इसमें समय की भी काफी बचत होगी और काफी कम संसाधन में कम समय में उत्पादन भी बढ़ेगा&period; मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को पटना के ज्ञान भवन में मत्स्य क्षेत्र में ड्रोन तकनीक की उपयोगिता और संभावनाएं विषय पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे&period;इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मत्स्यपालन के क्षेत्र में ड्रोन के उपयोग के बारे में लोगों को जानकारी देना है&period; जैसा कि कृषि के क्षेत्र में एवं अन्य क्षेत्रों में आजकल ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है&period; <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मात्स्यिकी के क्षेत्र में ड्रोन के उपयोग से समय एवं श्रम लागत में कमी किया जा सकता है एवं मनुष्यों के लिए जो कठिन एवं खतरनाक क्षेत्रों&comma; जैसे कि समुद्री क्षेत्र एवं जलाशय के क्षेत्रों में मत्स्य बीजों को छोड़ना&comma; मछली के आहार का वितरण&comma; समुद्रों एवं नदियों में आपदाओं के दौरान कुशलता से जीवन रक्षक जैकेट की आपूर्त्ति करते हुए बचाव राहत कार्यों में सहायता प्रदान करना है&period; मछली का परिवहन एक जगह से दूसरे जगह भी ड्रोन के माध्यम से किया जा सकता है&period; इतना ही नहीं ड्रोन विभिन्न कैमरों एवं सेंसरों से सुसज्जित रहता है&comma; अतः जलकरों के सर्वे एवं डाटा एकत्रित करने एवं जलक्षेत्रों के फोटो लेना इत्यादि कार्यों में ड्रोन काफी उपयोगी सिद्ध होगा&period;कार्यक्रम में मुख्यमंत्री&comma; बिहार के द्वारा बिहार राज्य में उपलब्ध अपार जल संपदाओं को त्वरित गति से विकसित कराने के लिए विभाग के पदाधिकारियों को प्रोत्साहित किया गया। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>कृषि रोडमैप के लागू होने के उपरान्त मात्स्यिकी के योजना के आकार में लगभग 150 गुणा की वृद्धि से मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में हुई उपलब्धि के बारे में बताया गया।मुख्यमंत्री बिहार द्वारा बताया गया कि वर्ष 2005 के पूर्व मात्स्यिकी विकास पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण बिहार राज्य में अवस्थित जल संपदाओं तथा मत्स्य कृषकों का समूचित विकास नहीं हो सका&comma; किंतु वर्ष 2005 के उपरान्त बिहार सरकार द्वारा वर्ष 2008 में कृषि रोड मैप लाया गया&comma; एवं वर्तमान में चतुर्थ कृषि रोड मैप के तहत मत्स्य प्रभाग हेतु विभिन्न महात्वाकांक्षी योजनाएँ जैसे कि मुख्यमंत्री समेकित चौर विकास योजना&comma; मुख्यमंत्री तालाब मात्स्यिकी विकास की योजना&comma; जलाषय मात्स्यिकी विकास योजना&comma; गंगा नदी तंत्र में नदी पुर्नस्थापन की योजना&comma; आदि विभिन्न योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। इस प्रकार वर्तमान में बिहार राज्य अंतर्स्थलीय मात्स्यिकी के क्षेत्र में देष में चौथा &lpar;4जी&rpar;स्थान पर हैं।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह&comma; केंद्रीय मत्स्यपालन&comma; पशुपालन एवं डेयरी मंत्री द्वारा मत्स्यपालन एवं मात्स्यिकी के क्षेत्र में ड्रोन तकनीक तथा विभाग द्वारा इस क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों के संबंध में विस्तारपूर्वक बताया गया&period; कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं केंद्रीय मंत्री&comma; राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के द्वारा विभागीय संचालित केन्द्र प्रायोजित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत कुल 05 लाभुकों यथा- अंजु देवी &lpar;पालीगंज&comma; पटना&rpar;&comma; ऊषा देवी मोकामा&comma; &lpar;पटना&rpar;&comma; मीरा देवी &lpar;मुंगेर&rpar;&comma; रीता रानी &lpar;वैषाली&rpar; तथा निषांत कुमार &lpar;समस्तीपुर&rpar; को अनुदान राषि का डमी चेक का वितरण तथा 15 मत्स्य पालकों को कुल 0&period;50 लाख मत्स्य बीज एवं 19 मत्स्य पालकों के बीच कुल 7 टन मत्स्य आहार का वितरण किया गया&period;साथ ही मंत्री&comma; मत्स्यपालन&comma; पषुपालन एवं डेयरी मंत्रालय&comma; भारत सरकार के द्वारा गंगा नदी के दीघा घाट&comma; पटना में केन्द्र प्रायोजित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजनान्तर्गत कुल 1&period;50 लाख मत्स्य अंगुलिकाओं का पुर्नस्थापन किया गया। इसका मुख्य उद्देष्य राज्य के बहते नदियों में मूल प्रजाति के मेजर कार्प मछलियों को पुर्नस्थापित किया जाना है&comma; जिससे कार्प मछलियों की नदियों में घटती आबादी का पुर्नस्थापन एवं नदियों के किनारे बसे हुए मछुआरों को आजीविका का साधन प्राप्त हो सकेगा।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>रेणू देवी&comma; मंत्री&comma; पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग&comma; बिहार&comma; द्वारा भी मत्स्य पालकों एवं उपस्थित पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए बताया कि सरकार द्वारा राज्य मे अवस्थित जल संपदाओं का उपयोग करते हुए राज्य का मत्स्य उत्पादन वर्ष- 2023-24 में 8&period;73 लाख मैट्रिक टन हुआ है&comma; फलतः मछली उत्पादन में राज्य आत्मनिर्भर हो रहा हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ”बिहार राज्य जलाषय मात्स्यिकी नीति 2022” के माध्यम से पषु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को जलाषयों में &OpenCurlyDoubleQuote;मात्स्यिकी अधिकार” दिया गया। परिणामस्वरूप जलाषय मात्स्यिकी विकास की योजना स्वीकृति प्रदान कर जलाषयों में अंगुलिका संचयन&sol;केज&sol;पेन अधिष्ठापन किया जा रहा हैं। इसके साथ ही मत्स्य पालकों&sol;मछुआरों के लिए 1-1 लाख जाल एवं नाव की उपलब्धता तथा मछुआरा आवास योजना के तहत 10&comma;000 आवास आवंटन करने हेतु केन्द्र सरकार के मत्स्यपालन विभाग के मंत्री से अनुरोध किया गया।विजय कुमार सिंहा&comma; उप मुख्यमंत्री&comma; बिहार द्वारा राज्य के मत्स्य पालकों को संबोधित करते हुए राज्य में मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने हेतु आह्वान किया गया तथा ड्रोन तकनीक को भी अपनाकर मात्स्यिकी गतिविधि में इसका उपयोग करने का सुझाव दिया गया।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>समारोह को डॉ0 विजय कुमार बेहरा&comma; मुख्य कार्यपाल हैदराबाद एवं सुश्री नीतू कुमारी प्रसाद&comma; संयुक्त सचिव &lpar;समुद्री मात्स्यिकी&rpar;&comma; भारत सरकार&comma; के द्वारा भी संबोधित किया गया&period; कार्यक्रम के तकनीक सत्र में हैदराबाद के वैज्ञानिक एवं तकनीकी टीम के द्वारा ड्रोन का स्पअम क्मउवदेजतंजपवद किया गया साथ ही कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न प्रकार के ड्रोन का भी प्रदर्षनी लगाया गया&period;<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><code> दरअसल&comma;ज्ञान भवन पटना में आयोजित &OpenCurlyQuote;&OpenCurlyQuote;मत्स्यपालन के क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग एवं प्रत्यक्षण&OpenCurlyQuote;&OpenCurlyQuote; विषय पर एक दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया&period; इस कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री&comma; मत्स्यपालन&comma; पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय&comma; भारत सरकार मुख्य अतिथि के रूप में राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी मौजूद रहे&period; साथ ही विजय कुमार सिन्हा&comma; उप मुख्यमंत्री&comma; बिहार सरकार एवं रेणु देवी&comma; मंत्री&comma; पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग&comma; बिहार सरकार&comma; भारत सरकार के पदाधिकारी&comma; राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड के मुख्य कार्यपालक&comma; बैरकपुर&comma; पश्चिम बंगाल में अवस्थित शोध संस्थान के निदेशक&comma; पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के प्रधान सचिव डॉ0 एन0 विजयलक्ष्मी&comma; निदेशक&comma; मत्स्य एवं विभाग के अन्य सभी पदाधिकारियों द्वारा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सहित अन्य अतिथियों का भव्य स्वागत किया गया&period; <&sol;code><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><code>इस कार्यक्रम में मात्स्यिकी के क्षेत्र में ड्रोन का उपयोग एवं प्रत्यक्षण देखने के लिए सभी जिलों से मत्स्यपालक किसान एवं मछुआ सहयोग समिति के सदस्यों के द्वारा भी भाग लिया&period; डॉ0 एन0 विजयलक्ष्मी&comma; प्रधान सचिव&comma; पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के द्वारा कार्यक्रम में पधारे सभी महानुभावों का स्वागत किया गया&period; प्रधान सचिव के द्वारा मत्स्य प्रभाग द्वारा राज्य के मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता में अभिवृद्धि हेतु किये गये उल्लेखनीय कार्यों तथा योजनाओं के सम्बन्ध में विस्तृत रूप से चर्चा करते हुए राज्य के सभी कृषकों को मत्स्यपालन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने तथा निबंधन कराने हेतु आहवान् किया गया&period; साथ ही मत्स्यपालन के क्षेत्र में ड्रोन के उपयोग के संबंध में आगन्तुकों को सम्बोधित किया गया&period; <&sol;code><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><code>कार्यक्रम में भारत सरकार के मत्स्य प्रभाग के वरीय पदाधिकारीगण एवं ड्रोन टीम के विशेषज्ञों तथा राज्य के मत्स्य प्रभाग के सभी पदाधिकारी उपस्थित हुए। इसके अलावे राज्य के विभिन्न जिलों के प्रगतिषील मत्स्य कृषक एवं प्रखण्ड मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के अध्यक्ष&sol;मंत्री मुख्य रूप से भाग लिए। यह कार्यक्रम भारत सरकार के मत्स्यपालन&comma; पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय&comma; राष्ट्रीय मात्स्यिकी विकास बोर्ड&comma; हैदराबाद एवं पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग&comma; बिहार सरकार के द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। अंत में अभिषेक रंजन निदेषक मत्स्य&comma; बिहार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।<&sol;code><&sol;p>&NewLine;

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