राज्य सूचना आयोग ने सूचना न देने पर अररिया सिविल सर्जन पर लगाया 25 हजार का जुर्माना

&NewLine;<p><&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p><strong>अररिया&comma; रंजीत ठाकुर।<&sol;strong> सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 &lpar;आरटीआई&rpar; के तहत अपीलकर्ता को सूचना न देने पर राज्य सूचना आयोग ने अररिया सिविल सर्जन पर 25 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया है। इस रकम की वसूली के लिए अररिया जिला पदाधिकारी&comma; कोषागार पदाधिकारी एवं महालेखाकार&comma;पटना को आदेश दिया गया है। बता दें कि अपीलकर्ता रोहित कुमार ने 27 सितम्बर 2021 को प्रपत्र क व 8 अक्टूबर 2021 को प्रथम अपील दायर किया था। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य सूचना आयोग के द्वारा 8 जुलाई 2025 को लोक सूचना पदाधिकारी सह सिविल सर्जन&comma;अररिया को पूर्ण सूचना उपलब्ध कराने के लिए अंतिम अवसर दिया गया था और पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराने तथा आयोग के आदेश का अनुपालन नहीं करने के लिए स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। हालांकि लोक सूचना पदाधिकारी सह सिविल सर्जन&comma;अररिया ने पत्रांक 1796 के तहत 24 जुलाई 2025 के द्वारा आयोग को स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया है तथा उसके साथ ज्ञापांक 484 बीस फरवरी 2025 की अनुलग्नक सहित प्रति सलंग्न की गई है&comma;जिसपर अपीलार्थी ने 24 मार्च 2025 को पिछली सुनवाई में आपत्ति उठाई थी की सूचना आधी-अधूरी है।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>बता दें कि लोक सूचना पदाधिकारी सह सिविल सर्जन&comma;अररिया के पत्रांक 2166 के तहत 7 अक्टूबर 2021 के द्वारा आवेदक को प्रथम बार सूचना प्रेषित की गई थी। इसके आलोक में 21 जनवरी 2025 को पारित आदेश में इस सूचना को अस्वीकृत कर सूचना उपलब्ध कराने के लिए लोक सूचना पदाधिकारी सह सिविल सर्जन&comma;अररिया को निर्देशित किया गया था। इसके बाद दो सुनवाई में पूर्ण सूचना उपलब्ध करवाने का अवसर दिया गया था। उसके बावजूद भी लोक सूचना पदाधिकारी के द्वारा अपीलार्थी को पूर्ण सूचना नहीं उपलब्ध कराई गई। इसके अलावे पिछली सुनवाई को लोक सूचना पदाधिकारी सह सीएस&comma;अररिया को उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था&comma;परंतु वे सुनवाई के दौरान अनुपस्थित थे। <&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>जिसके बाद लोक सूचना पदाधिकारी सह सीएस&comma;अररिया के विरुद्ध राज्य सूचना आयुक्त प्रकाश कुमार के निर्देश पर प्रशाखा पदाधिकारी राजन सहनी के द्वारा राज्य सूचना आयोग के आदेश का अनुपालन नहीं करने तथा अपीलार्थी को पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 &lpar;1&rpar; के तहत 25 हजार रूपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है। इधर आवेदक रोहित कुमार ने बताया कि आरटीआई के तहत सीएस से वित्तीय वर्ष 2017-18 से लेकर वर्तमान अवधि तक की रोकड़ पंजी एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र की सत्यापित छायाप्रति उपलब्ध करवाने व जिले में पंजीकृत नर्सिंग अस्पताल&comma; लैब&comma; डॉक्टर एवं दवा दुकानों की सूची उपलब्ध करवाने और वित्तीय वर्ष 2020-21 से वर्तमान अवधि तक की जिला पदाधिकारी के द्वारा दिए गए आदेशों&sol;निर्देशों की छायाप्रति उपलब्ध करवाने के लिए आवेदन किया गया था।<&sol;p>&NewLine;&NewLine;&NewLine;&NewLine;<p>मेरे द्वारा मांगी गई सूचना पर राज्य सूचना आयोग ने भी सीएस को पूर्ण सूचना उपलब्ध करवाने का आदेश दिया था। इसके बावजूद भी सीएस के द्वारा पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं करवाया गया इससे तो यह साफ हो गया है कि राज्य सूचना आयोग के आदेश का भी सीएस ने धज्जियां उड़ा दी है। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा मांगी गई सूचना जनहित से जुड़ा और सार्वजनिक योग्य था। इसके बावजूद भी सिविल सर्जन के द्वारा सूचना उपलब्ध नहीं करवाने से ऐसा प्रतीत होता है कि वे जान-बूझकर जिले भर में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग अस्पतालों&comma;लैब&comma;डॉक्टरों और दवाई दुकानों का बचाव संरक्षित करने के लिए और भ्रष्टाचार में संलिप्त रहने के लिए मेरे द्वारा मांगी गई सूचना उपलब्ध नही करवाया है। इधर इस संबंध में अररिया सिविल सर्जन कृष्णा कश्यप से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार करते हुए कल बात करने की बात कही।<&sol;p>&NewLine;

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